‘जादवपुर को लेनिन नगर बनाने की कोशिश खत्म’, शुभेंदु अधिकारी का ममता सरकार पर हमला, बोले- ‘गेरुआ विचारधारा से समझौता नहीं’

KNEWS DESK – पश्चिम बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) को लेकर बीजेपी नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विश्वविद्यालय में कथित राजनीतिक वर्चस्व, छात्रों पर दबाव और परिसर से जुड़े विवादों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।

शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में पश्चिम बंगाल में ‘जमातियों का राज’ रहा और इसी वजह से उर्दू को राज्य की दूसरी भाषा बनाया गया। हालांकि, यह उनके राजनीतिक आरोप हैं।

‘छात्रों पर रैलियों में शामिल होने का दबाव’

शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि जादवपुर विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में राष्ट्रवादी विचार रखने वाले छात्र पढ़ते हैं, लेकिन हॉस्टल में रहने वाले छात्रों पर विश्वविद्यालय की रैलियों में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जाता है।

उन्होंने विश्वविद्यालय में रैगिंग से जुड़े एक छात्र की मौत का मुद्दा भी उठाया और दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर में उनके साथ भी हमला हुआ था।

‘जादवपुर को लेनिन नगर बनाने की कोशिश खत्म’

बीजेपी नेता ने कहा कि जादवपुर विश्वविद्यालय को ‘लेनिन नगर’ बनाने की कोशिशों को खत्म कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों को सबक सिखाया जाएगा और वह अपनी ‘गेरुआ विचारधारा’ से कोई समझौता नहीं करेंगे।

छात्रों की ओर से लगाए जाने वाले ‘आजादी’ के नारों पर भी शुभेंदु अधिकारी ने सवाल उठाए। उन्होंने खुदीराम बोस, मातंगिनी हाजरा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और मास्टरदा सूर्य सेन जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र करते हुए पूछा कि छात्रों को इन स्वतंत्रता सेनानियों से कैसी विरासत मिली है।

‘गेरुआ आतंकवाद’ शब्द पर भी जताई नाराजगी

शुभेंदु अधिकारी ने ‘गेरुआ आतंकवाद’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अगर किसी मीडिया संस्थान ने इस शब्द के इस्तेमाल के लिए माफी नहीं मांगी तो बड़ी संख्या में साधु इसके खिलाफ खड़े होंगे।

उन्होंने कहा कि उन्हें बीमारी और उसके इलाज दोनों का पता है और गेरुआ विचारधारा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

JU और JUTA को लेकर भी निशाना

शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा विभाग को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (JUTA) जांच के दायरे में हैं।

उन्होंने नंदीग्राम और जंगलमहल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि जिस तरह उन्होंने वहां वामपंथी प्रभाव को चुनौती दी, उसी तरह जादवपुर विश्वविद्यालय में भी कथित राजनीतिक वर्चस्व को खत्म किया जाएगा।

शुभेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक एजेंडे का संकेत देते हुए कहा कि उनका एक काम ‘गेरुआ’ है और दूसरा मुख्यमंत्री बनना। उनके इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।

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