KNEWS DESK- रवि टम्टा ने यह प्रोटोटाइप अपने स्टार्टअप Hapida Sky Private Limited के तहत तैयार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ड्रोन तकनीक में बदलाव और सुधार करते हुए इस सिंगल-सीटर फ्लाइंग व्हीकल को विकसित किया। इसके बाद अल्मोड़ा के एक मैदान में इसका टेस्ट किया गया, जहां रवि ने खुद इसकी उड़ान का प्रदर्शन किया।
करीब एक साल की मेहनत के बाद तैयार हुआ प्रोटोटाइप
रवि टम्टा के मुताबिक, इस फ्लाइंग व्हीकल को तैयार करने में उन्हें करीब एक साल का समय लगा। हालांकि, इस प्रोजेक्ट के पीछे सिर्फ एक साल की मेहनत नहीं, बल्कि लंबे समय से किए जा रहे प्रयोग और रिसर्च भी शामिल हैं। सफल उड़ान के बाद रवि ने इसे अपने जीवन का बेहद खास दिन बताया और कहा कि HAPIDA SKYNeX की पहली सफल उड़ान लंबे समय से किए जा रहे शोध, संघर्ष, प्रयोग और लगातार प्रयासों का नतीजा है।
रवि ने इस प्रोजेक्ट को भारत में पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। हालांकि, फिलहाल इसे प्रोटोटाइप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। ऐसे वाहन को व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल करने से पहले कई चरणों के परीक्षण, सुरक्षा जांच और जरूरी नियामकीय मंजूरियों की जरूरत होगी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ उड़ान का VIDEO
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HAPIDA SKYNeX की टेस्टिंग का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। वायरल वीडियो में सिंगल-सीटर फ्लाइंग व्हीकल को उड़ान भरते हुए देखा जा सकता है। लोग रवि टम्टा के इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं और उनके इनोवेशन को लेकर उत्सुकता दिखाई दे रही है।
रवि टम्टा इससे पहले भी अलग-अलग तकनीकी प्रयोगों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों को कम समय में चार्ज करने के लिए एक इलेक्ट्रोलाइट पंप मशीन विकसित करने का दावा किया था। इसके अलावा उन्होंने मोबाइल चार्ज करने वाले जूतों, शुरुआती स्तर के हेलीकॉप्टर मॉडल और वन विभाग के कर्मचारियों के लिए GPS से लैस एक विशेष स्टिक पर भी काम किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी बधाई
रवि टम्टा की उपलब्धि पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उन्हें बधाई दी। उन्होंने HAPIDA SKYNeX प्रोटोटाइप के सफल उड़ान परीक्षण को युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और वैज्ञानिक सोच का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रवि का प्रयास उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है।
पहाड़ी इलाकों के लिए क्यों खास हो सकती है ऐसी तकनीक
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क कनेक्टिविटी कई बार चुनौती बन जाती है। पहाड़, गहरी घाटियां, भूस्खलन और खराब मौसम के कारण कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित होती है। ऐसे में भविष्य में अगर इलेक्ट्रिक पर्सनल एयर मोबिलिटी तकनीक सुरक्षित और व्यावहारिक रूप से विकसित होती है, तो इसका इस्तेमाल दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, आपातकालीन सेवाओं, जरूरी सामान की तेज डिलीवरी और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।
फिलहाल HAPIDA SKYNeX विकास के शुरुआती चरण में है। सफल प्रोटोटाइप टेस्ट के बाद अब इसके सामने सुरक्षा, बैटरी क्षमता, उड़ान विश्वसनीयता, संरचनात्मक मजबूती और नियामकीय मंजूरियों जैसी कई चुनौतियां होंगी। इसके बावजूद अल्मोड़ा के युवा इनोवेटर रवि टम्टा का यह प्रयास दिखाता है कि देश के छोटे शहरों और पहाड़ी क्षेत्रों से भी नई तकनीक और इनोवेशन की बड़ी कोशिशें सामने आ रही हैं।