डिजिटल डेस्क- महाराष्ट्र के चर्चित बारामती विमान हादसे की जांच अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। एनसीपी विधायक रोहित पवार द्वारा दर्ज कराई गई ‘जीरो FIR’ को अब राज्य की अपराध जांच विभाग ने अपनी चल रही जांच में शामिल करने का फैसला लिया है। इस घटनाक्रम से उम्मीद जताई जा रही है कि हादसे की असली वजहों तक पहुंचने में जांच एजेंसियों को नई दिशा मिलेगी। यह ‘जीरो FIR’ बैंगलोर में दर्ज कराई गई थी, जो बारामती एयरपोर्ट के पास 28 जनवरी को हुए विमान हादसे से जुड़ी है। इस दर्दनाक हादसे में उस समय के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मौत हो गई थी। हादसे के बाद से ही मामले की गंभीरता को देखते हुए कई एजेंसियां जांच में जुटी हुई हैं।
जीरो एफआईआर को आधिकारिक रूप से जांच का हिस्सा बनाने की तैयारी
रविवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि बेंगलुरु में दर्ज इस ‘जीरो FIR’ को पहले पुणे जिले के बारामती तालुका पुलिस स्टेशन भेजा गया था। वहां से इसे आगे CID को सौंप दिया गया, जो पहले से ही इस मामले की जांच कर रही है। अब इस FIR को आधिकारिक रूप से जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है, जिससे केस के तथ्यों और परिस्थितियों की गहराई से पड़ताल की जा सकेगी। इस मामले में AAIB भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन काम करने वाली यह एजेंसी विमान हादसों की तकनीकी जांच करती है। AAIB ने 28 फरवरी को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जमा की थी, जिसके आधार पर आगे की जांच को दिशा मिल रही है। CID अब इस रिपोर्ट और ‘जीरो FIR’ दोनों को साथ लेकर मामले की तह तक जाने की कोशिश करेगी।
क्या होती है जीरो एफआईआर
‘जीरो FIR’ क्या होती है, इसे लेकर भी इस मामले में चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, ‘जीरो FIR’ ऐसी प्राथमिकी होती है, जिसे किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया जा सकता है, चाहे अपराध उस क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में हुआ हो या नहीं। बाद में इस FIR को संबंधित थाने में ट्रांसफर कर दिया जाता है। रोहित पवार ने दावा किया था कि उन्हें कर्नाटक में FIR इसलिए दर्ज करानी पड़ी, क्योंकि महाराष्ट्र पुलिस ने उनकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं की थी। इससे पहले पुणे ग्रामीण पुलिस ने इस हादसे को लेकर ‘आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट’ (ADR) दर्ज की थी, जिसके आधार पर CID ने जांच शुरू की थी। महाराष्ट्र CID प्रमुख और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सुनील रामानंद ने बताया कि बेंगलुरु से मिली ‘जीरो FIR’ को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 180 के तहत एक बयान के रूप में लिया जाएगा और इसे जांच में शामिल किया जाएगा।