Knews Desk- देश में एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर का विस्तार लगातार तेज़ी से हो रहा है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, राजस्थान और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में हजारों किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क पर काम जारी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से यात्रा का समय घटेगा, माल ढुलाई तेज होगी और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में बताया कि देशभर में अब तक 10,389 किलोमीटर राष्ट्रीय हाई-स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं। इनमें से 4,809 किलोमीटर सड़क तैयार होकर चालू हो चुकी है, जबकि 5,580 किलोमीटर लंबी परियोजनाओं पर निर्माण कार्य जारी है। इसके अलावा 1,022 किलोमीटर लंबी परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन उनका आवंटन अभी बाकी है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा हाई-स्पीड कॉरिडोर?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राजस्थान 1,340 किलोमीटर परियोजनाओं के साथ सबसे आगे है, जिनमें से 1,192 किलोमीटर पूरे हो चुके हैं। इसके बाद पंजाब (923 किमी), आंध्र प्रदेश (893 किमी), उत्तर प्रदेश (884 किमी), हरियाणा (839 किमी), गुजरात (764 किमी), बिहार (589 किमी) और महाराष्ट्र में भी कई अहम परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा निर्माण जारी
निर्माणाधीन परियोजनाओं की बात करें तो पंजाब में 774 किलोमीटर, बिहार में 589 किलोमीटर, आंध्र प्रदेश में 585 किलोमीटर, उत्तर प्रदेश में 496 किलोमीटर और तेलंगाना में 445 किलोमीटर सड़क नेटवर्क पर काम चल रहा है। इससे आने वाले वर्षों में इन राज्यों की सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
कुछ परियोजनाओं का काम अभी शुरू नहीं
सरकार ने बताया कि कई महत्वपूर्ण हाई-स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन उनका निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश में कानपुर-कबरई हाई-स्पीड कॉरिडोर (118 किमी), गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर (46 किमी) और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर (43 किमी) जैसी परियोजनाएं फिलहाल आवंटन का इंतजार कर रही हैं।
इसी तरह महाराष्ट्र में नासिक-अहमदनगर-सोलापुर-अक्कलकोट हाई-स्पीड कॉरिडोर (374 किमी) सहित कई परियोजनाओं पर भी अभी काम शुरू होना बाकी है।
वधावन पोर्ट को मिलेगा हाई-स्पीड कनेक्शन
महाराष्ट्र के प्रस्तावित वधावन पोर्ट को देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए 32 किलोमीटर लंबा चार लेन एक्सेस कंट्रोल हाईवे बनाया जाएगा। करीब 4,362 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का ठेका दिया जा चुका है। इसके पूरा होने के बाद वधावन पोर्ट सीधे वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे और एनएच-48 से जुड़ जाएगा, जिससे माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स को बड़ी मजबूती मिलेगी।
देरी रोकने के लिए सरकार के कदम
सरकार का कहना है कि सड़क परियोजनाओं में देरी कम करने के लिए कई तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं। भूमि अधिग्रहण के लिए भूमिराशि पोर्टल और GIS आधारित सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। वहीं पर्यावरण मंजूरी के लिए परिवेश पोर्टल और रेलवे से जुड़े ROB/RUB डिजाइनों की ऑनलाइन मंजूरी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। केंद्र और राज्य सरकारें नियमित समीक्षा बैठकों के जरिए परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रख रही हैं, ताकि सड़क नेटवर्क का विस्तार तय समय में पूरा हो सके।