Knews Desk- मोदी कैबिनेट की हालिया बैठक में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने वाले दो बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई है। इनमें दिल्ली में 6-लेन द्वारका टनल परियोजना और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में कानपुर-कबराई हाईवे परियोजना शामिल है। इन दोनों परियोजनाओं को देश के परिवहन ढांचे में बड़ा बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी देते हुए बताया कि पहला प्रोजेक्ट दिल्ली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण 6-लेन द्वारका टनल है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 6970 करोड़ रुपये होगी। यह करीब 8 किलोमीटर लंबी टनल राजधानी दिल्ली के यातायात दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह टनल लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करती है और इससे एक नया ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर विकसित होगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का निर्माण इस तरह किया जाएगा कि दिल्ली के रिज क्षेत्र को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। टनल का निर्माण भूमिगत तरीके से किया जाएगा, जिससे पर्यावरणीय संतुलन को भी ध्यान में रखा जा सकेगा। यह परियोजना दिल्ली के प्रमुख इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी लाएगी।
दूसरा बड़ा फैसला उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़ा है। कैबिनेट ने कानपुर से कबराई तक 242 किलोमीटर लंबे हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। यह मार्ग कानपुर, हमीरपुर, महोबा होते हुए आगे भोपाल तक जुड़ेगा। इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से और मजबूत तरीके से जोड़ना है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह हाईवे पूरी तरह से एक्सेस-कंट्रोल्ड होगा और इसे BOT (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) टोल मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। इसमें ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों प्रकार के हिस्से शामिल होंगे। पहले चरण में ग्रीनफील्ड 4-लेन हाईवे का निर्माण किया जाएगा, जिसे भविष्य में 6-लेन तक विस्तारित करने की सुविधा के साथ डिजाइन किया गया है।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना न केवल यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगी। बुंदेलखंड क्षेत्र में डिफेंस कॉरिडोर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े कई नए निवेश प्रस्ताव पहले से ही सक्रिय हैं। ऐसे में यह हाईवे औद्योगिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी को नई गति देगा।
मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को 2047 के विजन के अनुरूप विकसित करने का निर्देश दिया है। इसी सोच के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आज बनने वाले ढांचे भविष्य की जरूरतों को भी पूरा कर सकें।
इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने से दिल्ली और उत्तर प्रदेश में यातायात व्यवस्था में सुधार, यात्रा समय में कमी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।