Knews Desk- सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देश दिया है कि वह राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के 10 प्रतिशत को-ऑप्शन (सह-चयन) के लिए एक समान, पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया तैयार करे। अदालत ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य महिला वकीलों के प्रतिनिधित्व को मजबूत करना और कानूनी पेशे में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अधिकांश राज्य बार काउंसिलों के चुनाव या तो पूरे हो चुके हैं या अंतिम चरण में हैं। ऐसे में अब केवल यह मुद्दा बचा है कि महिलाओं के लिए निर्धारित अतिरिक्त 10 प्रतिशत सीटों पर को-ऑप्शन कैसे किया जाएगा। सुनवाई के दौरान BCI ने अदालत को बताया कि उसने इस संबंध में नियम तैयार कर लिए हैं और उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने को तैयार है। कोर्ट ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जो सभी राज्यों में समान रूप से लागू की जा सके और किसी प्रकार का भेदभाव न हो।
पीठ ने यह भी याद दिलाया कि पहले के निर्देशों में महिलाओं के लिए कुल 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया गया था, जिसमें 20 प्रतिशत चुनाव के माध्यम से और 10 प्रतिशत को-ऑप्शन के जरिए सुनिश्चित किया जाना था। अदालत ने BCI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राधिका गौतम को यह अधिकार दिया कि वे राज्य बार काउंसिल के नवनिर्वाचित सदस्यों और संबंधित पक्षों से सलाह लेकर को-ऑप्शन की एक मानकीकृत प्रक्रिया तैयार करें।
सुनवाई के दौरान छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की समस्याओं का भी उल्लेख किया गया। वकीलों ने कहा कि गोवा, दमन-दीव और पूर्वोत्तर राज्यों जैसे क्षेत्रों को कई बार पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता है। इस पर अदालत ने कहा कि ये वास्तविक चिंताएं हैं और BCI को इन्हें ध्यान में रखना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि राज्य-विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम नियम तैयार किए जाएं, ताकि सभी क्षेत्रों को समान अवसर मिल सके।