सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर सियासी घमासान, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

Knews Desk- पिछले 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया। इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद समर्थकों और प्रदर्शनकारियों में नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने नारेबाजी करते हुए इस कदम का विरोध किया। वहीं, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) सहित कई विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखते हुए उन्हें आवश्यक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से की गई। साथ ही, जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से क्षेत्र खाली करने की अपील भी की गई।

इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर हमला बताया। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि सत्ता के अहंकार में सरकार जनता की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की मांगों पर बातचीत करने के बजाय उन्हें जबरन अस्पताल भेजा गया। संजय सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी को इस प्रकार हटाना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना पर आघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अब शांतिपूर्ण विरोध को भी बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। एक अन्य बयान में उन्होंने कहा कि जब जनता की शांतिपूर्ण आवाज को दबाया जाता है, तब लोकतंत्र कमजोर होता है और संविधान की भावना भी प्रभावित होती है।

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार का यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उनके अनुसार, किसी आंदोलन का जवाब बल प्रयोग से नहीं बल्कि संवाद के जरिए दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार पर विपक्ष और असहमति की आवाजों के प्रति असहिष्णु होने का आरोप लगाया। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि देश में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की लोकतांत्रिक परंपरा कमजोर होती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से बैठे लोगों के साथ इस प्रकार की कार्रवाई की जाती है, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उधर, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल की ओर जाने वाले कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी और लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की। नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि हाई कोर्ट के निर्देशों और चिकित्सकीय विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस ने पूरी कार्रवाई के दौरान संयम बरता और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने का प्रयास किया।

फिलहाल इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। जहां विपक्ष सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगा रहा है, वहीं प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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