Knews Desk- देश के सबसे बड़े ग्रामीण खेल आयोजनों में शामिल ईशा ग्रामोत्सव 2026 इस बार और भी बड़े स्तर पर आयोजित होने जा रहा है। दक्षिण भारत के गांवों में लोकप्रिय यह खेल उत्सव अब पहली बार उत्तर भारत के कई राज्यों तक पहुंच रहा है। इस बार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र समेत 10 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के ग्रामीण खिलाड़ी इसमें हिस्सा लेंगे।
आयोजन के 18वें संस्करण में करीब 7,000 टीमें भाग लेंगी। इसके जरिए लगभग 40,000 गांवों से 80,000 से अधिक खिलाड़ी मैदान में उतरेंगे। इनमें करीब 15,000 महिला खिलाड़ी भी शामिल होंगी। इस आयोजन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को सामने लाना और खासतौर पर महिलाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना है।

इस बार ईशा ग्रामोत्सव में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र के अलावा ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। प्रतियोगिता में पुरुषों के लिए वॉलीबॉल और महिलाओं के लिए थ्रोबॉल मुख्य खेल होंगे। zटूर्नामेंट में खिलाड़ियों को आकर्षक पुरस्कार भी दिए जाएंगे। ग्रैंड फिनाले में विजेता वॉलीबॉल और थ्रोबॉल टीमों को 5-5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिलेगी। उपविजेता टीमों को 3-3 लाख रुपये, जबकि तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों को क्रमशः 1 लाख रुपये और 50 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा क्लस्टर और डिवीजनल स्तर पर भी नकद पुरस्कार रखे गए हैं। पूरे आयोजन में एक करोड़ रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि वितरित की जाएगी।

ईशा ग्रामोत्सव का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में क्लस्टर स्तर के मुकाबले होंगे, इसके बाद डिवीजनल चरण और अंत में ग्रैंड फिनाले आयोजित किया जाएगा। क्लस्टर मुकाबले जुलाई से शुरू होंगे, जबकि अंतिम मुकाबला 6 सितंबर को कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में होगा। इस दौरान सद्गुरु भी मौजूद रहेंगे। उत्तर प्रदेश में क्लस्टर स्तर के मुकाबले 25 और 26 जुलाई को लखनऊ, वाराणसी, मुजफ्फरनगर और मेरठ में आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 1 और 2 अगस्त को गौतम बुद्ध नगर में डिवीजनल चरण के मुकाबले होंगे। वहीं, हरियाणा में पानीपत, करनाल और अंबाला में 25-26 जुलाई को मुकाबले होंगे, जबकि आगे के चरण हिसार, कुरुक्षेत्र और करनाल में आयोजित किए जाएंगे।
ईशा ग्रामोत्सव ने पिछले वर्षों में ग्रामीण महिलाओं को खेल के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने का अवसर दिया है। कई महिलाएं इस मंच के जरिए पहली बार घर से बाहर निकलकर खेल प्रतियोगिताओं में शामिल हुईं। थ्रोबॉल खिलाड़ी नंदिनी दुरईसामी बताती हैं कि पहले ग्रामीण महिलाओं के लिए खेलों में भाग लेने के अवसर बहुत सीमित थे, लेकिन ग्रामोत्सव ने उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मविश्वास बढ़ाने का मौका दिया। कई महिला खिलाड़ियों ने परिवार और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद खेल को जारी रखा है। गृहिणी से खिलाड़ी बनीं राजेश्वरी का कहना है कि नियमित अभ्यास और परिवार के सहयोग से उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया। उनके अनुसार, शुरुआत में कई मुश्किलें आईं, लेकिन मेहनत और लगन से उन्होंने अपनी पहचान बनाई।
पिछले दो दशकों में ईशा ग्रामोत्सव एक छोटे क्षेत्रीय आयोजन से विकसित होकर बड़े ग्रामीण खेल आंदोलन के रूप में सामने आया है। अब तक इस पहल से 35 हजार से अधिक गांवों के 2.6 लाख से ज्यादा ग्रामीण खिलाड़ी जुड़ चुके हैं। खेलों के साथ-साथ यह उत्सव ग्रामीण भारत की संस्कृति को भी मंच देता है। इसमें लोक कला, संगीत, नृत्य, पारंपरिक खेल और क्षेत्रीय व्यंजनों की झलक देखने को मिलती है। खो-खो, कबड्डी और गिल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक खेलों के साथ लोक परंपराओं का प्रदर्शन भी इस आयोजन का हिस्सा रहता है। ईशा ग्रामोत्सव 2026 ग्रामीण भारत की खेल प्रतिभाओं और सांस्कृतिक विरासत को एक बड़े मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।