Knews Desk- भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नेता के. अन्नामलाई द्वारा नई राजनीतिक पार्टी ‘वी द लीडर्स’ बनाने की घोषणा के बाद देश में राजनीतिक दलों के पंजीकरण की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है। भारत में कोई भी नागरिक या नागरिकों का समूह राजनीतिक पार्टी बना सकता है, लेकिन इसके लिए निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी होता है।
किसी नई राजनीतिक पार्टी के गठन के लिए सबसे पहले संगठन का संविधान तैयार किया जाता है, जिसमें पार्टी के उद्देश्य, कार्यप्रणाली, सदस्यता नियम और संगठनात्मक ढांचा शामिल होता है। इसके बाद पार्टी को गठन की तारीख से 30 दिनों के भीतर चुनाव आयोग में पंजीकरण के लिए आवेदन करना होता है।
आवेदन के साथ पार्टी का संविधान, पदाधिकारियों की सूची, सदस्यों का विवरण और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा किए जाते हैं। इसके अलावा पार्टी को यह भी घोषित करना होता है कि वह भारतीय संविधान, लोकतंत्र, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और देश की एकता एवं अखंडता के सिद्धांतों का पालन करेगी।
निर्वाचन आयोग आवेदन प्राप्त होने के बाद सार्वजनिक सूचना जारी करता है ताकि यदि किसी व्यक्ति या संस्था को पार्टी के नाम या उसके गठन पर आपत्ति हो तो वह अपनी बात रख सके। आपत्तियों और दस्तावेजों की जांच के बाद आयोग पार्टी को पंजीकृत राजनीतिक दल का दर्जा देता है।
हालांकि पंजीकरण मिल जाने के बाद भी किसी पार्टी को तुरंत राज्य या राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा नहीं मिलता। इसके लिए चुनावों में प्रदर्शन के आधार पर निर्धारित मानदंड पूरे करने होते हैं। चुनाव आयोग वोट प्रतिशत और सीटों के प्रदर्शन के आधार पर किसी दल को राज्य स्तरीय या राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्रदान करता है।
अन्नामलाई की नई पार्टी की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता भी बढ़ी है कि भारत में एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने और उसे आधिकारिक मान्यता दिलाने की प्रक्रिया आखिर क्या होती है।