KNEWS DESK- सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाने के मामले पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च से डर गई है, इसलिए उसने पुलिस कार्रवाई के जरिए आंदोलन को रोकने की कोशिश की।
संजय सिंह ने कहा कि 20 जुलाई को होने वाले संसद तक मार्च में देश के युवा, आम लोग और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद शामिल होने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को यह अंदाजा हो गया था कि सोनम वांगचुक की आवाज अब देशभर में बड़ा मुद्दा बन रही है, इसलिए उन्हें जंतर-मंतर से हटाने की कार्रवाई की गई।
AAP नेता ने कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से अनशन पर बैठे थे और वह देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में युवा पेपर लीक जैसी समस्याओं से प्रभावित हुए हैं और उनकी आवाज उठाने के लिए वांगचुक आंदोलन कर रहे थे। संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर संवाद नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक चल रहे अनशन के बावजूद प्रधानमंत्री या सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि बातचीत के लिए नहीं पहुंचा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति अपनी मांगों को लेकर इतने लंबे समय तक भूख हड़ताल कर रहा है तो सरकार को उससे बातचीत करनी चाहिए थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि शनिवार सुबह अचानक बड़ी संख्या में पुलिस बल जंतर-मंतर पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। संजय सिंह के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया और सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि वांगचुक ने 20 जुलाई को शांतिपूर्ण तरीके से संसद की ओर मार्च करने का आह्वान किया था। संजय सिंह ने सरकार पर सत्ता के अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार को आंदोलनों का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालना चाहिए।
AAP सांसद ने कहा कि सरकार ने पहले भी कई आंदोलनों के दौरान सख्ती दिखाई है। उन्होंने किसान आंदोलन और युवाओं से जुड़े प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि हर आंदोलन को बल के जरिए खत्म करने की कोशिश उचित नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन करें और अपनी आवाज को मजबूती से उठाएं। संजय सिंह ने कहा कि जनता की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता और लोकतंत्र में संवाद ही सबसे बड़ा रास्ता है।
वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के अनुसार, यह कदम मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह और अदालत के निर्देशों के तहत उठाया गया। पुलिस ने यह भी कहा कि पूरी कार्रवाई के दौरान संयम बरता गया और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर खाली करने की अपील की गई। इस पूरे मामले को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां विपक्ष सरकार पर आंदोलन दबाने का आरोप लगा रहा है, वहीं प्रशासन इसे स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था से जुड़ा कदम बता रहा है। 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर भी सभी की नजरें अब आगे की घटनाओं पर टिकी हैं।