Knews Desk- तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने दान के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। मंदिर को महज 10 घंटे के भीतर 96.98 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ, जो इसके इतिहास का सबसे बड़ा अल्पकालिक योगदान माना जा रहा है। यह रिकॉर्ड उस समय बना, जब टीटीडी ने दानदाताओं को मिलने वाली विशेष सुविधाओं में बदलाव की घोषणा की और नई दानदाता नीति लागू होने से पहले श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में दान किया।
टीटीडी बोर्ड ने 14 जुलाई को दोपहर में नई दानदाता नीति की घोषणा की थी। इसके तहत बताया गया कि पुरानी व्यवस्था के तहत मिलने वाले विशेष लाभ उसी रात 12 बजे तक ही मान्य रहेंगे। इस घोषणा के बाद श्रद्धालुओं के पास केवल लगभग 10 घंटे का समय बचा था। इसी दौरान ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से रिकॉर्ड स्तर पर दान प्राप्त हुआ। टीटीडी के अनुसार, इस अवधि में 2,354 श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन दान किया, जबकि 106 लोगों ने तिरुमला पहुंचकर ऑफलाइन योगदान दिया। बड़ी संख्या में दानदाताओं ने एक लाख से लेकर करोड़ों रुपये तक की राशि दान की। इनमें दो श्रद्धालुओं ने एक-एक करोड़ रुपये से अधिक का योगदान भी दिया।
पुरानी दान नीति के तहत दानदाताओं को विशेष दर्शन, सुपथम प्रवेश और वीआईपी ब्रेक दर्शन जैसी सुविधाएं मिलती थीं। दान की राशि के आधार पर इन विशेषाधिकारों का स्तर तय होता था। यही वजह रही कि नई नीति लागू होने से पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पुरानी व्यवस्था का लाभ लेने के लिए दान किया। टीटीडी बोर्ड ने हाल ही में दानदाता नीति में बदलाव का फैसला आम श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया है। बोर्ड का कहना है कि वीआईपी कोटे और विशेष दर्शन की अधिक संख्या के कारण सामान्य श्रद्धालुओं को कई बार 20 से 30 घंटे तक इंतजार करना पड़ता था। नई नीति का उद्देश्य आम भक्तों को अधिक प्राथमिकता देना और दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाना है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद विशेष सुविधाओं में बदलाव किया गया है, ताकि दर्शन प्रक्रिया अधिक संतुलित और पारदर्शी बन सके। इसी कारण पुरानी नीति समाप्त होने से पहले दानदाताओं में विशेष सुविधाएं हासिल करने की होड़ देखी गई। टीटीडी का यह रिकॉर्ड एक बार फिर देश के सबसे समृद्ध और सबसे अधिक श्रद्धालुओं वाले मंदिरों में तिरुमला की लोकप्रियता को दर्शाता है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि नई नीति लागू होने के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था और दान की परंपरा जारी रहेगी, लेकिन अब प्राथमिकता आम भक्तों को बेहतर और सुगम दर्शन उपलब्ध कराने पर रहेगी।