50 फीट गहरी खुदाई के बाद 200 टन मिट्टी की जांच में पांच हीरों की पुष्टि हुई. एक हीरा 1.22 कैरेट का बताया जा रहा है. हीरों की नीलामी हो चुकी है, लेकिन किसान योगेश्वर को अब तक अपनी जमीन के अधिग्रहण और मुआवजे की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है.
Knews Desk- छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के देवभोग क्षेत्र में एक किसान के खेत से पांच हीरे मिलने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई थी. जिस जमीन के नीचे कीमती खनिज होने की पुष्टि हुई, वहां अब दोबारा फसल उग रही है. हालांकि किसान योगेश्वर के लिए यह खुशी से ज्यादा चिंता का विषय बन गया है. उसे अभी तक यह नहीं बताया गया है कि भविष्य में उसकी जमीन पर खनन होगा या वह खेती जारी रख सकेगा.
मामला देवभोग क्षेत्र के पैंकिन गांव का है. अप्रैल-मई 2026 में NMDC और छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम की टीम ने इलाके में हीरों की तलाश और तकनीकी जांच शुरू की थी. योगेश्वर के खेत को केंद्र बनाकर आसपास के क्षेत्रों में भी ड्रिलिंग के लिए स्थान चिह्नित किए गए.
जांच के दौरान खेत में करीब 50 फीट लंबा, 50 फीट चौड़ा और 50 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया. खुदाई से निकली मिट्टी को आसपास के खेतों में रखा गया और करीब 200 टन मिट्टी को जांच के लिए मध्य प्रदेश की प्रयोगशाला भेजा गया.
जांच में मिले पांच हीरे, एक 1.22 कैरेट का
प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान मिट्टी से पांच हीरे मिलने की पुष्टि हुई. इनमें एक हीरा 1.22 कैरेट का बताया जा रहा है. इन हीरों की नीलामी भी हो चुकी है, लेकिन किसान के लिए असली सवाल अब उसकी जमीन को लेकर है.
योगेश्वर का कहना है कि कई महीने बीत जाने के बावजूद उसे जमीन के संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं मिला है. प्रशासन की ओर से खनन और जमीन आरक्षित किए जाने की मौखिक जानकारी दी गई थी. इसी वजह से उसने खेत में फिर से खेती शुरू कर दी.
जमीन का अधिग्रहण होगा या खेती जारी रहेगी?
हीरों की मौजूदगी वाले क्षेत्र को खनन के लिए आरक्षित किए जाने की बात सामने आई थी. लेकिन किसान को अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उसकी जमीन का अधिग्रहण होगा या नहीं. मुआवजे की राशि और आगे की खेती को लेकर भी कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है.
प्रशासन का कहना है कि जमीन के नीचे हीरों की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है. इसके बाद तकनीकी प्रक्रिया, खनन की योजना और लीज से जुड़ी कार्रवाई में समय लगता है. इसी कारण जमीन के भविष्य पर अंतिम निर्णय में देरी हो रही है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ऐसी प्रक्रियाएं लंबे समय तक लंबित रहने से अवैध गतिविधियों और भू-माफिया को बढ़ावा मिल सकता है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
15 साल पहले भी मिले थे हीरों के संकेत
महासमुंद के बलोदा बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में करीब 15 साल पहले सर्वे किया गया था. उस दौरान क्षेत्र में हीरों की मौजूदगी के संकेत मिले थे. इसके बाद 2026 में दोबारा तकनीकी जांच शुरू की गई.
अब पांच हीरों की पुष्टि और नीलामी के बाद किसान की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है. वह जानना चाहता है कि उसकी जमीन का क्या होगा, उसे मुआवजा मिलेगा या नहीं और क्या वह भविष्य में अपनी जमीन पर खेती कर पाएगा. इन सवालों का जवाब अभी भी स्पष्ट नहीं है.