सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री और इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध को हटाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में दखल देने से मना करते हुए कहा कि इस मामले में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को मामले पर जल्द अंतिम फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।
Knews Desk- जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की। गिर सोमनाथ जिले के कलेक्टर ने 10 अगस्त 2026 को सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में नॉन-वेज भोजन बनाने, बेचने और रखने पर प्रतिबंध लगाया था। इसके खिलाफ रेस्टोरेंट संचालकों ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया था।
30 अक्टूबर को गुजरात हाईकोर्ट की जस्टिस निशा ठाकोर की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार के प्रतिबंध वाले नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया था। इसके कुछ घंटे बाद गुजरात सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अर्जेंट अपील दायर की। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी, जिसके बाद मंदिर के आसपास नॉन-वेज की बिक्री पर प्रतिबंध फिर लागू हो गया।
इसके बाद रेस्टोरेंट संचालक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुनवाई के दौरान उनकी ओर से दलील दी गई कि नॉन-वेज भोजन की बिक्री और इसे बनाने पर रोक से उनका कारोबार पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की करीब 80 प्रतिशत आबादी मांसाहारी भोजन करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है और फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। अदालत ने हाईकोर्ट को मामले में जल्द अंतिम फैसला सुनाने को कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 दिसंबर को होगी।