अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी मतभेद सामने आने लगे हैं। पार्थ पवार की बढ़ती भूमिका, वरिष्ठ नेताओं से सलाह न लेने और विधायकों को विकास कार्यों के लिए फंड नहीं मिलने जैसे मुद्दों पर नाराजगी है। कोर कमेटी की बैठक में फिलहाल नियुक्तियों को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया।
Knews Desk – अजित पवार के निधन के बाद उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में संगठन और नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज होती दिख रही है। पार्टी के भीतर पार्थ पवार की भूमिका और बड़े फैसलों में वरिष्ठ नेताओं को शामिल नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विधायकों ने अपने विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिलने और पार्टी के अंदर बेहतर तालमेल की कमी का मुद्दा भी उठाया है।
3 नवंबर की रात उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के देवगिरी बंगले पर पार्टी विधायकों की बैठक हुई। करीब चार घंटे चली इस बैठक में पार्टी के 50 पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों में से 33 शामिल हुए। विधानसभा के 41 विधायकों में से 29 विधायक बैठक में मौजूद थे। बैठक में पार्टी के कामकाज और नेताओं के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
पार्थ पवार की बढ़ती भूमिका से क्यों नाराज हैं वरिष्ठ नेता?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुछ वरिष्ठ नेता पार्थ पवार की बढ़ती भूमिका से असहज हैं। उनकी शिकायत है कि पार्टी के अहम फैसले लेने से पहले उनसे सलाह नहीं ली जाती और पुराने नेताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। कुछ विधायकों ने यह भी कहा कि पार्टी के बड़े नेताओं के बीच क्या चल रहा है, इसकी जानकारी उन्हें समय पर नहीं मिलती।
बैठक में विधायकों ने विकास कार्यों के लिए फंड की कमी का मुद्दा उठाया। कुछ नेताओं ने एकनाथ शिंदे के विभागों से जुड़े काम नहीं होने की शिकायत भी की। इन मुद्दों को लेकर पार्टी के भीतर बेहतर तालमेल बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
दो नियुक्तियों को लेकर भी उठे सवाल
पार्टी में मुंबई अध्यक्ष पद पर जीशान सिद्दीकी और राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता पद पर उमेश पाटील की नियुक्तियों को लेकर भी नाराजगी सामने आई है। वरिष्ठ नेताओं की शिकायत है कि इन नियुक्तियों से पहले कोर कमेटी के सदस्यों से राय नहीं ली गई।
छगन भुजबल पहले कह चुके हैं कि उन्हें इन नियुक्तियों की जानकारी पार्टी से नहीं, बल्कि मीडिया के जरिए मिली थी। पार्टी के भीतर यह चिंता भी जताई जा रही है कि नए चेहरों को आगे बढ़ाने के दौरान अनुभवी नेताओं को पीछे किया जा रहा है।
दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात और मुंबई में हुई बैठकों के बाद पार्टी के कामकाज में सुधार के लिए चार पन्नों की योजना तैयार की गई है। इसमें पार्टी कार्यालय में जनता दरबार दोबारा शुरू करने, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के साथ हर सप्ताह बैठक करने, नेताओं के बीच तालमेल बेहतर बनाने और विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों पर ध्यान देने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
सुनेत्रा पवार ने विधायकों और नेताओं से एकजुट होकर काम करने की अपील की। उन्होंने 2029 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की सीटें बढ़ाने का लक्ष्य रखा और मंत्रियों को विधायकों के साथ मिलकर विकास कार्य पूरे कराने के निर्देश दिए। सूखाग्रस्त क्षेत्रों में जाकर किसानों की समस्याएं समझने पर भी जोर दिया गया। बैठक में पार्टी को वित्त विभाग वापस मिलने का मुद्दा भी उठा।
कोर कमेटी ने नियुक्तियों में बदलाव नहीं किया
बुधवार को हुई कोर कमेटी की बैठक में पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका। बैठक में तय किया गया कि फिलहाल हाल में की गई नियुक्तियों में बदलाव नहीं होगा। जीशान सिद्दीकी मुंबई अध्यक्ष और उमेश पाटील राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता बने रहेंगे।
पार्थ पवार ने दोनों के अगले छह महीने के कामकाज पर नजर रखने की बात कही। उन्होंने यह भरोसा भी दिया कि भविष्य में पार्टी के बड़े फैसले कोर कमेटी से चर्चा के बाद ही लिए जाएंगे। बैठक के बाद पार्थ पवार और सुनेत्रा पवार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के सामने नेताओं की नाराजगी दूर करने और संगठन को एकजुट रखने की चुनौती है। पार्थ पवार की भूमिका, वरिष्ठ नेताओं को फैसलों में शामिल करने, विधायकों के विकास कार्यों के लिए फंड और वित्त विभाग जैसे मुद्दे पार्टी के लिए अहम बने हुए हैं।
फिलहाल कोर कमेटी की बैठक से विवाद का कोई निर्णायक समाधान सामने नहीं आया है। अब यह देखना होगा कि सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी इन मतभेदों को किस तरह दूर करती है और संगठन के भीतर बेहतर समन्वय स्थापित कर पाती है या नहीं।