उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का अंतिम चरण चल रहा है, लेकिन इस बीच हेली सेवाओं की सुरक्षा और संचालन को लेकर नई बहस छिड़ गई है। बीते दिनों 30 अक्टूबर को बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा हेलीकॉप्टर जोशीमठ क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दर्दनाक हादसे में पायलट समेत छह लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था और खराब मौसम के बावजूद उड़ान की अनुमति दिए जाने को लेकर कई सवाल खड़े हुए। इन्हीं सवालों के बीच 31 अक्टूबर को उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण यानी UCADA की हाईलेवल बैठक हुई। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दो अहम फैसले लिए गए। अब चार्टर हेलीकॉप्टर में पायलट के साथ को-पायलट का होना अनिवार्य होगा। वहीं प्रत्येक उड़ान के बाद पायलट को अपनी रिपोर्ट UCADA को सौंपनी होगी। ये नए नियम 2 नवंबर से लागू किए गए हैं। इसके अलावा हादसे के बाद एहतियातन ट्रांस भारत एविएशन के पूरे बेड़े की उड़ानों पर भी रोक लगाई गई है। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बनाए गए इन नए नियमों पर हेली ऑपरेटरों ने विरोध जताया है। DGCA के सख्त सुरक्षा प्रावधानों और UCADA के साथ सहमति नहीं बनने के चलते ऑपरेटरों ने चार्टर्ड हेली सेवाएं बंद कर दी हैं। फिलहाल यह रोक 10 नवंबर तक या अगले यात्रा सीजन तक जारी रहने की बात सामने आई है। ऐसे में हादसे के बाद सुरक्षा बढ़ाने की कोशिशों के बीच हेली सेवाओं का बंद होना यात्रियों के लिए नई परेशानी बनता दिख रहा है। वही इसका असर प्रदेश की राजनीति में भी पड़ता दिख रहा है, जहाँ विपक्ष ने हेली सेवाओं के मानको व यात्री सुरक्षा से जोड़ते हुए कई सवाल दागे है। जिसपर राजनीति भी जमकर हो रही है।
चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड में हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद सरकार और नागरिक उड्डयन विभाग ने सुरक्षा मानकों को सख्त करने की दिशा में कदम उठाए हैं। UCADA की हाई लेवल बैठक में चार्टर हेलीकॉप्टर में पायलट के साथ को-पायलट की अनिवार्यता और हर उड़ान के बाद पायलट की रिपोर्ट जमा करने जैसे फैसले लिए गए। ये नियम 2 नवंबर से लागू भी हो चुके हैं। लेकिन सुरक्षा के नाम पर उठाए गए इन कदमों ने हेली ऑपरेटरों के बीच असहमति पैदा कर दी है। नतीजा यह है कि चार्टर्ड हेली सेवाओं पर रोक लग गई है, जिससे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है। वहीं, इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्ष हादसे को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है और हेली सेवाओं के संचालन, सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। दूसरी ओर, सुरक्षा नियमों को लेकर ऑपरेटरों का विरोध भी सामने आ रहा है। ऐसे में सवाल सिर्फ नए नियमों को लागू करने का नहीं, बल्कि यात्रियों की जान की सुरक्षा और हेली सेवाओं के सुचारू संचालन के बीच संतुलन बनाने का भी है। वही सत्ता पक्ष का मानना है कि जो भी नियम व कानून बनाये गये है वह यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा के हित को देखते हुए बनाये गये है जिसपर विपक्ष को राजनीति करने से बचना चाहिए।
चारधाम यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवाएं श्रद्धालुओं के लिए सुविधा का एक बड़ा माध्यम रही हैं, खासकर बुजुर्गों और उन यात्रियों के लिए जो कठिन पहाड़ी रास्तों से यात्रा करने में असमर्थ हैं। लेकिन लगातार सामने आ रहे हादसों ने इन सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में पायलट के साथ को-पायलट की अनिवार्यता और हर उड़ान के बाद रिपोर्टिंग जैसे फैसले सुरक्षा के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं। हालांकि नए नियमों को लेकर ऑपरेटरों का विरोध और चार्टर्ड सेवाओं का बंद होना भी एक बड़ी चुनौती है। सवाल यह है कि क्या सुरक्षा मानकों को लेकर सभी पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकती। वही विपक्ष ने भी कई सवाल खड़े करने का काम किया है क्योंकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से बढ़कर कोई सुविधा नहीं हो सकती। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि सरकार, UCADA और हेली ऑपरेटर मिलकर ऐसा रास्ता निकालें,जहां सुरक्षा से कोई समझौता न हो और यात्रियों को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।