महाराष्ट्र में सरकारी कामों के भुगतान में देरी का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है। सिविल ठेकेदारों ने अमरावती में लोक निर्माण विभाग (PWD) कार्यालय के बाहर प्रतीकात्मक ‘तेरहवीं’ कर अपना विरोध दर्ज कराया। महाराष्ट्र स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (MSCA) का दावा है कि पिछले डेढ़ साल में आर्थिक संकट के चलते नौ ठेकेदारों की जान गई है। वहीं, राज्य सरकार के अनुसार बकाया भुगतान की समस्या दूर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
Knews Desk – महाराष्ट्र में सरकारी परियोजनाओं के भुगतान में देरी को लेकर ठेकेदारों का आक्रोश सामने आया है। अमरावती में सिविल ठेकेदारों के एक समूह ने लोक निर्माण विभाग के कार्यालय के बाहर सरकार का प्रतीकात्मक ‘तेरहवीं संस्कार’ आयोजित किया। इस विरोध के जरिए ठेकेदारों ने लंबे समय से लंबित बिलों और उससे पैदा हो रही आर्थिक परेशानियों की ओर ध्यान दिलाने की कोशिश की।
महाराष्ट्र स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (MSCA) के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में भुगतान अटके होने के कारण आर्थिक दबाव झेल रहे नौ ठेकेदारों की जान गई है। रिपोर्ट में कुछ ठेकेदारों के परिवारों का कहना है कि सरकारी कामों के बिल नहीं मिलने से उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा था। हालांकि, इन मौतों के कारणों और भुगतान के बीच संबंध को संबंधित परिवारों तथा संगठन के आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
90 हजार करोड़ रुपये के बकाये का दावा
MSCA का दावा है कि महाराष्ट्र सरकार पर ठेकेदारों का करीब 90 हजार करोड़ रुपये बकाया है। संगठन के अनुसार, बड़ी रकम उन परियोजनाओं से जुड़ी है जिन्हें वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 में मंजूरी दी गई थी। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने कुल लंबित भुगतान करीब 17 हजार करोड़ रुपये बताया है और कहा है कि इसमें से 6,200 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
स्टेट इंजीनियर्स एसोसिएशन के अमरावती जिला अध्यक्ष उज्ज्वल पांडे ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले उपलब्ध फंड की तुलना में कई गुना अधिक रकम के वर्क ऑर्डर जारी किए गए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ठेकेदारों से काम का वर्क ऑर्डर हासिल करने के लिए करीब 10 फीसदी कमीशन लिया जाता है। ये आरोप हैं; इनके संबंध में स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।
‘लाडकी बहिन’ योजना के खर्च पर उठाए सवाल
ठेकेदारों ने राज्य सरकार की ‘लाडकी बहिन’ योजना पर होने वाले खर्च का हवाला देते हुए लंबित बिलों के भुगतान में देरी पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने भी आरोप लगाया है कि गुजरात और आंध्र प्रदेश के ठेकेदारों के बिल चुकाए जा रहे हैं, जबकि महाराष्ट्र के स्थानीय ठेकेदारों का भुगतान अटका हुआ है।
महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग के मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले के मुताबिक, विभाग के पास 17 हजार करोड़ रुपये के बिल लंबित थे, जिनमें से 6,200 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि एक करोड़ रुपये से कम के लंबित बिल वाले छोटे ठेकेदारों का बकाया चुकाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार मुख्य ठेकेदारों को भुगतान करती है और सब-कॉन्ट्रैक्टर विभाग में पंजीकृत नहीं होते।
ठेकेदारों ने 19 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन के दौरान अमरावती में सरकार की प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली थी। इसके बाद सोमवार को प्रतीकात्मक ‘तेरहवीं’ आयोजित की गई। ठेकेदारों का कहना है कि लंबित भुगतान की समस्या के समाधान के लिए अभी और कदम उठाए जाने की जरूरत है।