मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के उपचुनाव में भोपाल के मोबाइल कारोबारी राजकुमार लोहानी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। कांग्रेस के विधायक हेमंत कटारे उनके प्रस्तावक बने हैं। हालांकि, नामांकन के साथ हलफनामा दाखिल नहीं किए जाने के कारण उनका पर्चा खारिज होने की संभावना जताई गई है।
Knews Desk – मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुकाबले भोपाल के मोबाइल कारोबारी राजकुमार लोहानी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। कांग्रेस ने उनके समर्थन का दावा किया है। इस घटनाक्रम ने राज्यसभा उपचुनाव की चर्चा को और दिलचस्प बना दिया है।
68 वर्षीय राजकुमार लोहानी भोपाल के पुराने शहर के घोड़ा नक्कास इलाके के निवासी हैं। उन्होंने हायर सेकेंडरी तक पढ़ाई की है और मोबाइल एक्सेसरीज की दुकान चलाते हैं। उन्होंने नामांकन दाखिल करने के लिए अंतिम दिन का इंतजार किया और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा जमा किया।
कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे बने प्रस्तावक
राजकुमार लोहानी के नामांकन के दौरान कांग्रेस के छह विधायक विधानसभा में मौजूद थे। कांग्रेस के उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे उनके प्रस्तावक बने। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने दावा किया कि पार्टी के 10 विधायकों ने लोहानी को समर्थन दिया है।
कांग्रेस ने हरदीप सिंह पुरी की उम्मीदवारी का विरोध करते हुए जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों और कथित संबंधों का मुद्दा उठाया है। वहीं, हरदीप सिंह पुरी विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज कर चुके हैं। इन आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि राजनीतिक आरोपों के तौर पर देखा जाना चाहिए।
हलफनामा नहीं होने से नामांकन पर संकट
एक अधिकारी के मुताबिक, राजकुमार लोहानी का नामांकन मंगलवार को होने वाली जांच के दौरान खारिज हो सकता है, क्योंकि उन्होंने हलफनामा दाखिल नहीं किया है। ऐसे में उनके नामांकन की वैधता पर सवाल खड़ा हो गया है। अंतिम स्थिति नामांकन पत्रों की जांच के बाद स्पष्ट होगी।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। बीजेपी ने हरदीप सिंह पुरी को इस सीट से उम्मीदवार बनाया है। राज्यसभा उपचुनाव के लिए 12 नवंबर को मतदान होना है। 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत है, जबकि कांग्रेस अपने दम पर यह सीट जीतने की स्थिति में नहीं है। चुनाव में जीत के लिए 116 वोटों की जरूरत बताई गई है।