चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं की समीक्षा का सुझाव, राष्ट्रीय हेलीकॉप्टर सुरक्षा समीक्षा समिति बनाने और 90 दिनों में रिपोर्ट सौंपने की मांग।
Knews Desk – उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लगातार सामने आ रहे हेलीकॉप्टर हादसों ने हवाई सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर चारधाम यात्रा के दौरान संचालित होने वाली हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। चमोली में हुए हालिया हेलीकॉप्टर हादसे के बाद पायलटों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। संगठन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हेलीकॉप्टर संचालन से जुड़े सुरक्षा नियमों में बदलाव करने की मांग की है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में हेलीकॉप्टर उड़ाना सामान्य उड़ानों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। यहां मौसम तेजी से बदलता है, कई बार दृश्यता बेहद कम हो जाती है और ऊंचे पहाड़ों के बीच उड़ान भरना पायलटों के लिए जोखिम भरा होता है। ऐसी परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना जरूरी है। संगठन का मानना है कि लगातार सामने आ रहे हादसों को देखते हुए मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा की जानी चाहिए।
FIP ने अपने पत्र में कहा है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में खराब मौसम, कम दृश्यता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां हेलीकॉप्टर संचालन को बेहद संवेदनशील बनाती हैं। उड़ान के दौरान मौसम में अचानक बदलाव होने से जोखिम और बढ़ सकता है। ऐसे में हादसों को केवल दुर्घटना मानकर नजरअंदाज करने के बजाय उनके कारणों, संचालन की प्रक्रिया, पायलटों के प्रशिक्षण और सुरक्षा इंतजामों की व्यापक समीक्षा की जरूरत है।
संगठन ने हेलीकॉप्टर सेवाओं से जुड़े सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के साथ-साथ मौसम संबंधी सटीक जानकारी और उड़ान संचालन की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया है। FIP ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से मुलाकात के लिए समय भी मांगा है, ताकि हेलीकॉप्टर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जा सके।
चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं की समीक्षा की मांग भी संगठन के प्रमुख सुझावों में शामिल है। यात्रा के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ समेत अन्य धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है। FIP का सुझाव है कि पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन जरूरत, मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उड़ानों की संख्या और संचालन से जुड़े नियमों की समीक्षा भी इसी आधार पर की जानी चाहिए।
पायलटों के संगठन ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत एक राष्ट्रीय हेलीकॉप्टर सुरक्षा समीक्षा समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा है। इस समिति का उद्देश्य देश में हो रहे हेलीकॉप्टर हादसों और उनसे संबंधित सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करना होगा। FIP ने सुझाव दिया है कि समिति अपनी रिपोर्ट 90 दिनों के भीतर सौंपे, ताकि हादसों के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों की पहचान कर जरूरी सुधार किए जा सकें।
संगठन का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी समिति गठित होने से हेलीकॉप्टर हादसों की समीक्षा व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी। इससे सुरक्षा मानकों, प्रशिक्षण, मौसम संबंधी जानकारी और संचालन प्रक्रिया में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है। उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर हादसों के बाद उठी यह मांग चारधाम यात्रा के दौरान हवाई सेवाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चर्चा का विषय बन गई है।