उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के तहत चयनित अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन की नई नीति जारी की है। इसमें गंभीर अपराधों, दोषसिद्धि, बार-बार आपराधिक मामलों और गलत जानकारी देने पर नियुक्ति से जुड़े नियम स्पष्ट किए गए हैं। हालांकि, हर FIR दर्ज होने पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्यता नहीं होगी।
Knews Desk– उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कैरेक्टर वेरिफिकेशन को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है। अपर मुख्य सचिव एम. देवराज की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक, यह नीति राज्य सरकार के विभागों के साथ निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्तशासी निकायों, उपक्रमों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर लागू होगी। यह व्यवस्था इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में तैयार की गई है।
पांच श्रेणियों में बांटे गए अपराध
नई नीति में अपराधों और प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों को पांच कैटेगरी में बांटा गया है। कैटेगरी-A में हत्या, बलात्कार, दहेज मृत्यु, मानव तस्करी, डकैती, आतंकवादी गतिविधियां, गंभीर साइबर अपराध, पेपर लीक और फर्जी प्रमाणपत्र जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। इनमें निर्धारित परिस्थितियों में आरोप तय होने या दोषसिद्धि पर अयोग्यता हो सकती है।
कैटेगरी-B में NDPS, UAPA, पॉक्सो, भ्रष्टाचार निवारण और धनशोधन से जुड़े निर्धारित अपराध शामिल हैं। कैटेगरी-C में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कुछ कानूनों के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई को रखा गया है। कैटेगरी-D में ऐसे अपराध हैं, जिनमें सामान्यतः दोषसिद्धि के बाद अयोग्यता लागू होगी। वहीं, कैटेगरी-E में बार-बार आपराधिक मामलों में संलिप्तता के लिए नियम तय किए गए हैं।
हर FIR पर नहीं जाएगी नौकरी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल FIR दर्ज होने, जांच लंबित रहने या आरोपपत्र दाखिल होने से अपने आप अयोग्यता नहीं होगी, यदि अदालत ने आरोप तय नहीं किए हैं। कुछ छोटे और शमनीय अपराधों में भी निर्धारित शर्तों के तहत राहत मिल सकती है।
जानकारी छिपाने पर नियुक्ति रद्द
अभ्यर्थियों को आवेदन और स्वघोषणा पत्र में गिरफ्तारी, FIR, लंबित मुकदमों, दोषसिद्धि और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जानकारी देनी होगी। तथ्य छिपाने या गलत जानकारी देने पर नियुक्ति रद्द होने के साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
30 दिन में देनी होगी सत्यापन रिपोर्ट
पुलिस महानिदेशक अभिसूचना और जिलाधिकारियों को संदर्भ मिलने के 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। सामान्य मामलों में सत्यापन के इंतजार में नियुक्ति प्रक्रिया रोकना जरूरी नहीं होगा। हालांकि, संवेदनशील पदों पर नियुक्ति से पहले सत्यापन पूरा करना अनिवार्य हो सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नौकरी के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जाएगा।