Knews Desk– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर महर्षि वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि महर्षि वाल्मीकि के सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं। ये विचार हर युग में राष्ट्र को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि मानवता के लिए महर्षि वाल्मीकि के अनमोल संदेश देशवासियों का सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे।
महर्षि वाल्मीकि को भारतीय साहित्य और संस्कृति में विशेष स्थान प्राप्त है। उन्हें रामायण के रचयिता के रूप में जाना जाता है। उनकी रचना में भगवान राम के जीवन, आदर्शों और मर्यादाओं के माध्यम से समाज को नैतिकता, कर्तव्य, करुणा और सेवा की सीख दी गई है। महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं आज भी सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर एक अन्य पोस्ट में संस्कृत सुभाषितम भी साझा किया। इसमें महर्षि वाल्मीकि के जीवन से जुड़ी उस घटना का उल्लेख किया गया, जब क्रौंच पक्षी के वध और उसकी साथी के करुण विलाप को देखकर उनके हृदय में शोक उत्पन्न हुआ। यही शोक श्लोक के रूप में प्रकट हुआ और संस्कृत काव्य परंपरा में एक महत्वपूर्ण प्रसंग बना।
साझा किए गए सुभाषितम में बताया गया कि कुश और यज्ञ की समिधाएं लेने गए महर्षि वाल्मीकि ने क्रौंच पक्षी के करुण विलाप को सुना। उनके हृदय में उत्पन्न करुणा ने श्लोक का रूप लिया। इस प्रसंग को महर्षि वाल्मीकि की संवेदनशीलता, करुणा, तपस्या और विद्वत्ता से जोड़कर देखा जाता है। रामायण की रचना के संदर्भ में भी इस घटना का विशेष महत्व बताया जाता है।इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी महर्षि वाल्मीकि को याद किया था। उन्होंने कहा था कि हजारों वर्ष बीत जाने के बावजूद महर्षि वाल्मीकि की रामायण आज भी लोगों को नई सीख देती है। उनके अनुसार, रामायण जीवन में निरंतर प्रयास करते रहने के साथ-साथ सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का महत्व भी समझाती है।
प्रधानमंत्री ने भगवान राम के चरित्र को इन मूल्यों का सुंदर उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को स्वीकार किया तथा निषादराज की मित्रता को सम्मान दिया। सबको साथ लेकर चलने की भावना आज भी समाज को दिशा देती है। पीएम मोदी ने अयोध्या के राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी के मंदिर भी बनाए गए हैं।उन्होंने यह भी बताया कि अयोध्या के एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, ऐसे प्रयास उस महान परंपरा को समृद्ध करते हैं, जिसमें सेवा, समरसता और करुणा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। महर्षि वाल्मीकि जयंती पर प्रधानमंत्री का संदेश भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और सामाजिक एकता के महत्व को रेखांकित करता है।