करीना कपूर के शो में कृति ने अपने फिल्मी सफर और किरदारों पर खुलकर बात की। एक्ट्रेस ने बताया कि करियर की शुरुआत में उन्हें बार-बार ‘अच्छी लड़की’ वाले रोल मिलते थे, लेकिन अब वह कमियों और खूबियों से भरे किरदार निभाना चाहती हैं।
Knews Desk – बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन अपने करियर में लगातार नए तरह के किरदार निभाने की कोशिश कर रही हैं। फिल्म ‘हीरोपंती’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखने वाली कृति ने करीब 12 साल के सफर में कई अलग-अलग भूमिकाएं निभाई हैं। अब एक्ट्रेस ने बताया है कि करियर की शुरुआत में एक जैसे किरदार मिलने से वह बोर हो गई थीं और ऐसे रोल करना चाहती थीं, जो उन्हें अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलने का मौका दें।
करीना कपूर के शो ‘What Women Want’ में बातचीत के दौरान कृति ने अपने शुरुआती दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में आने के बाद उनके पास चुनने के लिए ज्यादा विकल्प नहीं थे। ऐसे में वह मिलने वाले किरदारों में से बेहतर भूमिका चुनने की कोशिश करती थीं।
कृति के मुताबिक, लंबे समय तक उन्हें फिल्मों में ऐसी लड़की के किरदार मिलते रहे, जो संस्कारी और शर्मीली होती थी, कभी कोई गलती नहीं करती थी और जिसे मुसीबत से बचाने के लिए किसी पुरुष की जरूरत पड़ती थी। उन्होंने कहा कि पहले फिल्मों में महिलाओं को अक्सर पुरुषों की नजर से दिखाया जाता था।
एक्ट्रेस ने बताया कि अब फिल्मों में महिलाओं के किरदारों को लेकर बदलाव देखने को मिल रहा है। लेखकों ने ऐसी महिला किरदार लिखने शुरू किए हैं, जो असल जिंदगी की तरह गलतियां करती हैं, गलत फैसले लेती हैं और जिनमें कमियां भी होती हैं। कृति का मानना है कि ऐसे किरदार ज्यादा वास्तविक लगते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद भी लंबे समय तक अच्छी लड़की वाले किरदार निभाकर बोर हो गई थीं। कृति ने मजाकिया अंदाज में बताया कि असल जिंदगी में भी उनके अंदर हमेशा अच्छी लड़की बने रहने की आदत है।
कृति सेनन ने अपनी फिल्म ‘दो पत्ती’ में डबल रोल निभाने के अनुभव पर भी बात की। उन्होंने बताया कि फिल्म में एक ऐसा किरदार निभाना उनके लिए अलग अनुभव था, जो स्वार्थी था और दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करता था। इस भूमिका ने उन्हें अभिनय के नए पहलुओं को तलाशने का मौका दिया।
हाल ही में कृति अपनी फिल्म ‘कॉकटेल 2’ में काम को लेकर भी चर्चा में रही हैं। अब वह ऐसे किरदार चुनना चाहती हैं, जो केवल अच्छे या बुरे की श्रेणी में न बंटे हों, बल्कि उनमें इंसानों की तरह कमियां और खूबियां दोनों मौजूद हों।