हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल के बीच गुरुग्राम के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। करीब 40 घंटे तक बिजली गुल रहने से लोगों को अंधेरे और पानी की कमी का सामना करना पड़ा, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में भी उत्पादन ठप होने की स्थिति बनी।
Knews Desk – बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर साइबर सिटी गुरुग्राम के कई इलाकों में देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार रात 10 बजे के बाद से बिजली आपूर्ति प्रभावित होने लगी और कई क्षेत्रों में करीब 40 घंटे तक लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।
भीम नगर, दौलताबाद, बसई, गढ़ी हरसरू, दयानंद कॉलोनी, सेक्टर-9, हरि नगर, सेक्टर-10, आईडीसी, अशोक विहार, शिवाजी नगर, धनवापुर, सूर्या विहार, न्यू पालम विहार, खांडसा, न्यू कॉलोनी, गुड़गांव गांव, बजघेड़ा, भीमगढ़ खेड़ी, राजेंद्र पार्क और शीतला कॉलोनी समेत कई इलाकों में बिजली संकट की सूचना मिली। पटौदी, फर्रुखनगर और जमालपुर क्षेत्र के लोग भी प्रभावित हुए।
बिजली आपूर्ति बाधित होने का असर पानी की उपलब्धता पर भी पड़ा। घरों में पानी नहीं पहुंचने से लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में दिक्कत हुई। सुबह बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी से लेकर लोगों के काम पर निकलने तक, कई परिवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। पानी की कमी के कारण कुछ बच्चे स्कूल भी नहीं जा सके।
दौलताबाद फ्लाईओवर पर लोगों ने लगाया जाम
बिजली बहाल नहीं होने से नाराज लोगों ने दौलताबाद फ्लाईओवर पर काफी देर तक जाम लगाया। इसके बावजूद बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल नहीं हो सकी। हड़ताल पहले से घोषित होने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठे।
रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली आपूर्ति में आई समस्या के बीच फ्यूज व्यवस्था हटाए जाने को भी परेशानी बढ़ने की वजह बताया गया। कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान खराबी दूर करने और शिकायतों का जल्द निस्तारण करने की व्यवस्था प्रभावित हुई, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने में मुश्किल हुई।
औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित
बिजली संकट का असर गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी पड़ा। सेक्टर-37, बसई, कादीपुर, उद्योग विहार और बेगमपुर खटौला सहित कई क्षेत्रों की औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हुआ। इससे कारोबार और श्रमिकों के कामकाज पर भी असर पड़ा।
पीएफटीआई के चेयरमैन दीपक मैनी ने कहा कि हड़ताल को देखते हुए प्रशासन को उद्यमियों के साथ पहले ही संवाद करना चाहिए था। उनके मुताबिक, यदि बिजली आपूर्ति सामान्य बनाए रखना संभव नहीं था, तो उद्योगों को पहले से स्थिति बताकर जरूरी योजना बनाने का मौका दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बिजली संकट के कारण पूरे दिन कर्मचारियों और मैनपावर को बैठना पड़ा।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच गुरुग्राम में बिजली और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों का संकट गहरा गया। आम लोगों के साथ उद्योगों को भी नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे में हड़ताल की पूर्व जानकारी होने के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई, इसे लेकर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।