दिल्ली के प्रदर्शनों के पीछे विदेशी नेटवर्क? फ्रांस के IAP संगठन और 101 संगठनों पर क्या है दावा!

Knews Desk- रिपोर्ट में इंडियन अलायंस पेरिस (IAP) नाम के संगठन का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि यह संगठन फ्रांस और भारत में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच संपर्क स्थापित करने का काम करता है। संगठन ने भारत में हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्हें दूसरे देशों में चल रहे आंदोलनों से जोड़कर देखा है। IAP ने न्यूयॉर्क के मैनहट्टन स्थित द पीपल्स फोरम के साथ भी काम किया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि संगठन भारत में प्रदर्शनों को संचालित कर रहा था या उन्हें भड़काने में उसकी कोई भूमिका थी।

रिपोर्ट में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल नाम के संगठन का भी उल्लेख है। यह संगठन विभिन्न देशों के राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों को एक मंच पर लाने की बात करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने 16 अक्टूबर को जारी जानकारी में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों का एक साथ जिक्र किया था। संगठन ने इन आंदोलनों को संगठित राजनीतिक ताकत में बदलने और उनके बीच संपर्क स्थापित करने की संभावनाओं पर भी बात की थी।

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में अमेरिकी कारोबारी नेविल रॉय सिंघम से जुड़े संगठनों का भी जिक्र किया गया है। इनमें कोडपिंक (CODEPINK) और ब्रेकथ्रू न्यूज (BreakThrough News) शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन संगठनों ने फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों की जानकारी दूसरे देशों तक पहुंचाई। कोडपिंक ने फ्रांस से अमेरिका तक विरोध-प्रदर्शनों के संदेश का उल्लेख करते हुए 10 से 12 नवंबर के बीच अमेरिका में अभियान चलाने की बात कही थी। इस अभियान में सैन्य खर्च के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास पर अधिक धन खर्च करने की मांग शामिल थी।

रिपोर्ट में फ्रांस में आगामी प्रदर्शनों की योजनाओं का भी उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक, प्रदर्शनकारी 24 अक्टूबर को फिर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे थे, जिसे एक्ट-II नाम दिया गया था। डिजिटल नक्शे पर 212 स्थानों पर प्रदर्शन की योजना दिखाई गई थी। इसके बाद 31 अक्टूबर को एक्ट-III और नवंबर में भी प्रदर्शनों की तैयारी का जिक्र किया गया। इसके अलावा, विभिन्न देशों के छात्र और युवा संगठन 20 नवंबर को इंटरनेशनल यूथ स्ट्राइक की तैयारी कर रहे थे। उनकी मांगों में महंगाई, सरकारी खर्च में कटौती, सैन्य खर्च और पूंजीवादी व्यवस्था का विरोध शामिल था।इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच संपर्क, संदेशों का आदान-प्रदान और प्रदर्शनों का प्रचार अपने आप में किसी देश में अशांति फैलाने या आंदोलन को विदेश से नियंत्रित करने का प्रमाण नहीं है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में संगठनों के बीच संबंधों और प्रदर्शनों के प्रचार का दावा किया गया है, लेकिन भारत में प्रदर्शन भड़काने या उन्हें विदेश से संचालित करने के ठोस सबूत नहीं दिए गए हैं। इसलिए इन दावों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।

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