बॉलीवुड सिंगर दलेर मेहंदी की उत्तराखंड में हुई परफॉर्मेंस को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। मीका सिंह और बादशाह जैसे कलाकारों के दलेर मेहंदी के समर्थन में सामने आने के बीच सिंगर सोना मोहपात्रा ने इस मामले पर अलग नजरिया पेश किया है। उन्होंने कहा कि दिग्गज कलाकारों के योगदान और सम्मान का ख्याल रखना जरूरी है, लेकिन टिकट खरीदकर कार्यक्रम देखने आने वाले दर्शकों को भी एक ईमानदार परफॉर्मेंस मिलने की उम्मीद करने का हक है।
सोना मोहपात्रा ने दिल्ली में आयोजित दूसरे सूफी हेरिटेज फेस्टिवल में दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस देखने का अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वह और उनकी टीम खास तौर पर दलेर मेहंदी का सूफी अंदाज सुनने के लिए कार्यक्रम में रुके थे, लेकिन उनका अनुभव उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस से निराश हुईं सोना मोहपात्रा
सोना मोहपात्रा ने मंगलवार को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि वह और उनकी टीम दलेर मेहंदी की प्रस्तुति देखने के लिए उत्साहित थे। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार सिंगर कुछ अलग अंदाज में सूफी संगीत पेश करेंगे। हालांकि, सोना के मुताबिक, परफॉर्मेंस उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी।
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उन्होंने दावा किया कि दलेर मेहंदी गाते समय असहज नजर आ रहे थे और सुरों को लंबे समय तक संभाल नहीं पा रहे थे। सोना ने यह भी कहा कि परफॉर्मेंस के दौरान बार-बार एक ही म्यूजिकल लाइन दोहराई जा रही थी। उनके मुताबिक, धीरे-धीरे कुछ दर्शक कार्यक्रम छोड़कर जाने लगे।
सोना ने बताया कि उस समय वह और उनकी टीम असहज और दुखी महसूस कर रहे थे, लेकिन दलेर मेहंदी के प्रति सम्मान के कारण उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि, अब उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या उस समय चुप रहना सही था।
सोना ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्होंने और उनकी टीम ने कुछ नहीं कहा और सम्मान के कारण चुप रहे। लेकिन अब उनके मन में सवाल है कि क्या यह वास्तव में सम्मान था या फिर अपनी चुप्पी के जरिए वे ऐसी स्थिति को बढ़ावा दे रहे थे, जिस पर सवाल उठाया जाना चाहिए था।
‘दिग्गज कलाकार का सम्मान हो, लेकिन दर्शकों को भी मिले ईमानदार परफॉर्मेंस’
सोना मोहपात्रा ने स्पष्ट किया कि किसी कलाकार के वर्षों के योगदान और उपलब्धियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि एक दिग्गज कलाकार को उनकी पूरी जिंदगी की उपलब्धियों के लिए सम्मान, सहानुभूति और आभार मिलना चाहिए। इसके साथ ही दर्शकों को भी एक ईमानदार परफॉर्मेंस की उम्मीद करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी कलाकार की तबीयत ठीक नहीं है या वह प्रस्तुति देने की स्थिति में नहीं है, तो इस परिस्थिति को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालना चाहिए। उनके मुताबिक, दर्शकों और आयोजकों को बार-बार इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए, जबकि कलाकार के आसपास मौजूद लोग स्थिति को नजरअंदाज करते रहें।
सोना का कहना है कि किसी कलाकार की खराब तबीयत को लेकर उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करना सही नहीं है, लेकिन दर्शकों को बिना किसी स्पष्टीकरण के निराश छोड़ देना भी उचित नहीं है।
उत्तराखंड के मंत्री के व्यवहार पर भी उठाया सवाल
दरअसल, दलेर मेहंदी को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ, जब उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने नई टिहरी में आयोजित सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले के दौरान मंच पर ही सिंगर की परफॉर्मेंस पर सवाल उठाए थे। मंत्री ने कहा था कि दलेर मेहंदी को दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए बुलाया गया था।
इसके बाद सोशल मीडिया पर मंत्री के व्यवहार और दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस को लेकर बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने मंत्री के तरीके की आलोचना की, जबकि कुछ लोगों ने सिंगर की प्रस्तुति पर भी सवाल उठाए। दलेर मेहंदी के नशे में होने और ठीक से नहीं गाने के आरोप भी लगाए गए, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, मीका सिंह समेत कई कलाकारों ने दलेर मेहंदी का समर्थन किया। दूसरी ओर, समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में सुबोध उनियाल ने दावा किया कि सिंगर लिप-सिंक कर रहे थे। मंत्री ने यह भी कहा कि कार्यक्रम के लिए दलेर मेहंदी को 35 लाख रुपये दिए गए थे।
सोना मोहपात्रा ने इस पूरे विवाद में एक अहम सवाल उठाया है। उनके मुताबिक, मंत्री के व्यवहार की आलोचना और परफॉर्मेंस से जुड़े सवाल दो अलग-अलग मुद्दे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह यह तय नहीं कर सकतीं कि मंत्री ने जिस तरह अपनी बात रखी, वह सही था या गलत।
सोना ने कहा कि वह एक कलाकार के तौर पर अपनी बात रख रही हैं और उन्हें पता है कि इसके लिए उनकी आलोचना भी हो सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सम्मान एकतरफा अधिकार नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाला रिश्ता है।
दलेर मेहंदी की विरासत का सम्मान करते हुए सोना ने आखिर में सवाल किया कि क्या कलाकारों के प्रति सम्मान के साथ-साथ दर्शकों को भी सम्मान देना जरूरी नहीं है।