KNEWS DESK- शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने और चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का विशेष महत्व होता है। साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ के साथ खान-पान से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए। व्रत के दौरान कुछ लोग फलाहार करते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार उपवास रखते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि शरद पूर्णिमा के व्रत में क्या खाना उचित माना जाता है, किन चीजों से परहेज करना चाहिए और व्रत का पारण कब किया जाएगा।
शरद पूर्णिमा के व्रत में क्या खाएं?
शरद पूर्णिमा के व्रत में खान-पान का चुनाव अपनी धार्मिक परंपरा और व्रत के नियमों के अनुसार करना चाहिए। फलाहार करने वाले श्रद्धालु इन चीजों को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
- सात्विक भोजन: व्रत के दौरान फलाहार करने वाले लोग हल्का और सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। इससे दिनभर की दिनचर्या बनाए रखने में मदद मिलती है।
- फल और दूध: ताजे फल, दूध और दूध से बनी चीजें फलाहार के सामान्य विकल्प हैं। इन्हें अपनी सुविधा और व्रत के नियमों के अनुसार लिया जा सकता है।
- मखाने और खीर: शरद पूर्णिमा पर दूध, चावल और मखाने से बनी खीर का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। कई घरों में इसे भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
- कुट्टू और सिंघाड़े का आटा: व्रत में अनाज से परहेज करने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन खा सकते हैं।
- पर्याप्त पानी: उपवास के दौरान शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए। यदि आपके व्रत के नियम इसकी अनुमति देते हैं, तो अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ भी लिए जा सकते हैं।
शरद पूर्णिमा पर किन चीजों से बचना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा के व्रत में खान-पान की शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। व्रत करने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार कुछ चीजों से परहेज करते हैं।
- मांसाहारी भोजन और मदिरा: व्रत के दौरान मांस, मछली, अंडे और शराब से परहेज करने की परंपरा है।
- लहसुन और प्याज: कई घरों में व्रत और पूजा के दौरान लहसुन-प्याज से बने भोजन का सेवन नहीं किया जाता।
- तली-भुनी चीजें: अधिक तेल-मसाले वाले व्यंजनों से बचना बेहतर है, खासकर तब जब व्रत के दौरान हल्का भोजन करना हो।
- अनाज: जो श्रद्धालु फलाहार का व्रत रखते हैं, वे अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार सामान्य अनाज से परहेज करते हैं।
- बासी भोजन: पूजा और व्रत के दौरान ताजा तथा स्वच्छ भोजन ग्रहण करने पर जोर दिया जाता है।
ध्यान रखें कि व्रत के नियम अलग-अलग परिवारों और धार्मिक परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए अपने घर में प्रचलित परंपरा के अनुसार ही खान-पान का चुनाव करें।
शरद पूर्णिमा पर खीर का क्या है महत्व?
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा काफी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणों को विशेष महत्व दिया जाता है। कई श्रद्धालु दूध और चावल से बनी खीर को रात में खुले स्थान पर रखते हैं और अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इस अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। हालांकि, चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को लेकर किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावों को निश्चित वैज्ञानिक लाभ नहीं समझना चाहिए। खीर को साफ और सुरक्षित स्थान पर रखना जरूरी है, ताकि उसमें धूल-मिट्टी या कीड़े न पड़ें।
शरद पूर्णिमा 2026: व्रत का पारण कब करें?
शरद पूर्णिमा के व्रत का पारण 26 अक्टूबर 2026, सोमवार को सुबह 9 बजकर 41 मिनट से पहले करने की जानकारी दी गई है। हालांकि, पारण का सही समय व्रत की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
शरद पूर्णिमा के व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
शरद पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ के साथ मन की शांति और सात्विक आचरण को भी महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, भगवान का स्मरण करते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व है। व्रत के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। लंबे समय तक भूखे रहने से कमजोरी महसूस हो सकती है, इसलिए अपनी शारीरिक स्थिति और व्रत के नियमों के अनुसार ही उपवास करें। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या नियमित दवाएं लेनी पड़ती हैं, तो व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।