Asian Para Games 2026: एशियन पैरा गेम्स में भारत का कमाल, शूटिंग में मोना अग्रवाल ने जीता गोल्ड, बनाया एशियन गेम्स रिकॉर्ड

KNEWS DESK- जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भारतीय निशानेबाज मोना अग्रवाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। उन्होंने महिलाओं के 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 इवेंट में 250 अंक हासिल कर एशियन गेम्स रिकॉर्ड बनाया। इसी स्पर्धा में भारत की अवनी लेखारा ने 249.6 अंक के साथ सिल्वर मेडल जीता। इस तरह भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही इवेंट में गोल्ड और सिल्वर दोनों पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इस उपलब्धि के साथ दोनों निशानेबाजों ने 2028 लॉस एंजिल्स पैरालिंपिक्स के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है।

महिलाओं के 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 इवेंट में मोना अग्रवाल ने 250 अंक हासिल किए। उनके इस प्रदर्शन ने उन्हें गोल्ड मेडल दिलाने के साथ एशियन गेम्स रिकॉर्ड भी दिलाया। वहीं, इसी स्पर्धा में अवनी लेखारा 249.6 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहीं और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा। मोना ने अवनी को 0.4 अंक से पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पिछले एशियन पैरा गेम्स में अवनी लेखारा ने इसी इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था, लेकिन इस बार उन्हें सिल्वर से संतोष करना पड़ा। मोना ने क्वालिफिकेशन राउंड में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने 629.1 अंक हासिल कर एशियन रिकॉर्ड बनाया और शीर्ष स्थान पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाई। वहीं, अवनी लेखारा ने क्वालिफिकेशन राउंड में 626.4 अंक हासिल किए थे। इस जीत के साथ दोनों भारतीय निशानेबाजों ने 2028 लॉस एंजिल्स पैरालिंपिक्स के लिए भी क्वालिफाई किया।

कौन हैं मोना अग्रवाल?

मोना अग्रवाल राजस्थान के सीकर की रहने वाली हैं। उन्होंने शूटिंग को अपना करियर बनाने से पहले वॉलीबॉल समेत कई खेलों में हाथ आजमाया था। साल 2021 में उन्होंने निशानेबाजी को अपने करियर के रूप में चुना और इसके बाद अपनी मेहनत तथा प्रदर्शन से पहचान बनाई। मोना की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। जब वह महज नौ महीने की थीं, तब उन्हें पोलियो हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने खेलों में आगे बढ़ने का हौसला बनाए रखा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने में सफलता हासिल की। मोना तीन बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके परिवार में बेटे की चाहत थी और इस वजह से बचपन में उन्हें अनचाही संतान के रूप में देखा गया। हालांकि, उनकी दादी गीतादेवी ने हमेशा उनका साथ दिया। परिवार में मिले इस समर्थन और अपने दृढ़ संकल्प के दम पर मोना ने अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

मोना अग्रवाल की उपलब्धि उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। उन्होंने 2021 में शूटिंग की शुरुआत की और अब एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड जीतना और एशियन रिकॉर्ड बनाना उनके खेल करियर की बड़ी उपलब्धि है। वहीं, अवनी लेखारा का सिल्वर मेडल भी भारत के लिए महत्वपूर्ण सफलता है। दोनों खिलाड़ियों ने एक ही स्पर्धा में शीर्ष दो स्थान हासिल कर भारतीय पैरा शूटिंग की ताकत दिखाई है।

मोना अग्रवाल की कहानी बताती है कि मजबूत इच्छाशक्ति, लगातार मेहनत और सही दिशा में किए गए प्रयासों से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। अब 2028 लॉस एंजिल्स पैरालिंपिक्स के लिए क्वालिफाई करने के बाद भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें इन दोनों निशानेबाजों के आगामी प्रदर्शन पर रहेंगी।

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