KNEWS DESK- नवरात्रि के नौ दिनों में अगर आप रोजाना साबूदाना खिचड़ी और खीर खाकर ऊब गए हैं, तो इस बार अपनी व्रत की थाली में कुछ नया शामिल करें। समा के चावल की खिचड़ी से लेकर कुट्टू का चीला, मखाना खीर और शकरकंद चाट तक, ये चार रेसिपी स्वादिष्ट होने के साथ बनाने में भी आसान हैं।
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ व्रत रखने की परंपरा है। इन नौ दिनों में कई लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार खानपान में बदलाव करते हैं। व्रत के दौरान साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना खीर और आलू जैसी चीजें अक्सर खाई जाती हैं। हालांकि, रोजाना एक जैसा भोजन करने से कई बार लोग बोर हो जाते हैं और कुछ नया खाने का मन करने लगता है। ऐसे में कुछ आसान व्रत वाली रेसिपी आपके खाने का स्वाद बढ़ा सकती हैं। आइए जानते हैं चार ऐसी डिश के बारे में, जिन्हें कम समय में घर पर तैयार किया जा सकता है।
समा के चावल की खिचड़ी
साबूदाना खिचड़ी का एक अच्छा विकल्प समा के चावल की खिचड़ी है। इसे आलू, मूंगफली और हल्के मसालों के साथ तैयार किया जा सकता है। समा के चावल जल्दी पक जाते हैं और इन्हें अपनी पसंद के अनुसार हल्का या मसालेदार बनाया जा सकता है। इसे बनाने के लिए आधा कप समा के चावल, एक उबला आलू, दो बड़े चम्मच भुनी मूंगफली, एक चम्मच घी या मूंगफली का तेल, जीरा, हरी मिर्च, सेंधा नमक, हरा धनिया और नींबू की जरूरत होगी।
सबसे पहले समा के चावल को दो से तीन बार धोकर 15 मिनट के लिए भिगो दें। अब एक कड़ाही में घी गर्म करें और उसमें जीरा व हरी मिर्च डालें। इसके बाद कटे हुए उबले आलू को हल्का भूनें। इसमें चावल और सेंधा नमक मिलाकर डेढ़ कप पानी डालें। कड़ाही को ढककर लगभग 10 से 12 मिनट तक पकाएं। चावल नरम हो जाएं, तो ऊपर से भुनी मूंगफली, हरा धनिया और नींबू का रस डालकर परोसें। ध्यान रखें कि पानी जरूरत से ज्यादा न डालें, वरना खिचड़ी चिपचिपी हो सकती है।
कुट्टू के आटे का चीला
व्रत में कुछ कुरकुरा और स्वादिष्ट खाने का मन हो, तो कुट्टू के आटे का चीला अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें लौकी मिलाने से इसका स्वाद और बनावट बेहतर हो सकती है। इसे दही या व्रत में खाई जाने वाली चटनी के साथ परोसा जा सकता है। इसके लिए आधा कप कुट्टू का आटा, तीन से चार चम्मच कद्दूकस की हुई लौकी, दो चम्मच दही, सेंधा नमक, हरी मिर्च और थोड़ा घी चाहिए।
सबसे पहले एक बर्तन में कुट्टू का आटा, कद्दूकस की हुई लौकी, दही, सेंधा नमक और बारीक कटी हरी मिर्च डालकर मिलाएं। जरूरत के अनुसार पानी डालकर घोल तैयार करें। अब गर्म तवे पर थोड़ा घी लगाएं और घोल को फैलाकर चीले का आकार दें। इसे धीमी से मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक पकाएं। तैयार चीले को दही या व्रत वाली चटनी के साथ खाएं। आटा खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और ताजगी का ध्यान रखें।
मखाने की खीर
अगर व्रत के दौरान मीठा खाने का मन है और साबूदाना खीर से कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं, तो मखाने की खीर बना सकते हैं। दूध, मखाने और इलायची से तैयार होने वाली यह डिश स्वादिष्ट होती है और इसे गर्म या ठंडा, दोनों तरह से खाया जा सकता है। मखाने की खीर बनाने के लिए एक कप मखाना, दो कप दूध, एक से दो चम्मच घी, इलायची, कटे हुए बादाम और स्वादानुसार चीनी या मिश्री लें।
सबसे पहले कड़ाही में घी गर्म करके मखानों को हल्का भून लें। ठंडा होने पर इन्हें मोटा-मोटा कूट लें। अब एक बर्तन में दूध उबालें और उसमें कुटे हुए मखाने डाल दें। इसे धीमी आंच पर 10 से 12 मिनट तक पकाएं। मखाने नरम हो जाएं, तो स्वादानुसार चीनी या मिश्री और इलायची मिलाएं। इसके बाद पांच से दस मिनट और पकाएं। ऊपर से कटे हुए बादाम डालकर खीर परोसें। अगर खीर ज्यादा गाढ़ी हो जाए, तो जरूरत के अनुसार थोड़ा दूध मिलाया जा सकता है।
शकरकंद की चाट
व्रत में नमकीन और चटपटा खाने का मन हो, तो शकरकंद की चाट एक आसान विकल्प है। इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और इसके लिए बहुत अधिक सामग्री की भी जरूरत नहीं होती। उबली शकरकंद को कुछ साधारण चीजों के साथ मिलाकर स्वादिष्ट चाट तैयार की जा सकती है। इसके लिए दो उबली हुई शकरकंद, सेंधा नमक, काली मिर्च, नींबू का रस, हरा धनिया और भुनी हुई मूंगफली लें।
सबसे पहले उबली हुई शकरकंद को छोटे टुकड़ों में काट लें। अब इसमें सेंधा नमक, काली मिर्च, नींबू का रस और भुनी हुई मूंगफली मिलाएं। ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिला लें। आपकी चटपटी शकरकंद चाट तैयार है। इसे ताजा बनाकर खाना बेहतर रहता है।
नवरात्रि के व्रत में इन चारों रेसिपी को शामिल करके आप रोजाना के भोजन में स्वाद और विविधता ला सकते हैं। हालांकि, व्रत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और सेंधा नमक जैसे विकल्पों को अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार चुनें। यदि आप पूरे दिन उपवास रखते हैं, तो अपनी सेहत और जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी पीने तथा संतुलित मात्रा में भोजन करने का भी ध्यान रखें।