Knews Desk- आज के समय में विद्यार्थियों को पढ़ाई, परीक्षा, करियर और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े कई तरह के दबाव का सामना करना पड़ता है। कई बार सहपाठियों से तुलना, अच्छे अंक लाने की चिंता और भविष्य को लेकर अनिश्चितता भी उनके तनाव को बढ़ा देती है। ऐसे में विद्यार्थियों की समस्याओं को समझना और उन्हें सही मार्गदर्शन देना स्कूलों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। इसी दिशा में NCERT ने शिक्षकों और काउंसलिंग प्रोफेशनल्स के कौशल को विकसित करने के लिए डिप्लोमा कोर्स इन गाइडेंस एंड काउंसलिंग शुरू करने की घोषणा की है। यह कोर्स जनवरी 2027 से शुरू किया जाएगा।
इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों की शैक्षणिक और सामाजिक-भावनात्मक समस्याओं को पहचानने तथा उनसे निपटने के लिए जरूरी कौशल प्रदान करना है। इसके माध्यम से शिक्षकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि विद्यार्थी किन परिस्थितियों में तनाव का सामना कर रहे हैं और उन्हें किस तरह उचित सलाह दी जा सकती है। कोर्स में विद्यार्थियों की बात ध्यान से सुनने, उनकी परेशानियों को समझने और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
डिप्लोमा कोर्स के पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों की शैक्षणिक चुनौतियों के समाधान के साथ उनकी सामाजिक और भावनात्मक जरूरतों को समझने पर ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों को इस तरह प्रशिक्षित करने की योजना है कि वे विद्यार्थियों को सही निर्णय लेने, अपनी जिम्मेदारियों को समझने और सकारात्मक व्यवहार विकसित करने में सहायता कर सकें। इसका उद्देश्य स्कूलों में ऐसी व्यवस्था को मजबूत करना है, जहां विद्यार्थी अपनी समस्याओं को खुलकर साझा कर सकें और समय पर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।NCERT का यह डिप्लोमा कोर्स एक साल का होगा और इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले छह महीने की पढ़ाई डिस्टेंस मोड में होगी। इसके बाद अगले तीन महीने फेस-टू-फेस प्रशिक्षण दिया जाएगा। अंतिम तीन महीने इंटर्नशिप के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। शिक्षकों को अपने गृह जनपद में ही इंटर्नशिप करने की सुविधा भी दी जा सकती है, जिससे उन्हें अपने आसपास के शैक्षणिक माहौल में सीखे गए कौशल का उपयोग करने का मौका मिलेगा।
इस डिप्लोमा कोर्स को NCERT के छह केंद्रों पर संचालित किया जाएगा। इनमें दिल्ली, अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूरु और शिलांग शामिल हैं। प्रत्येक केंद्र पर कोर्स के लिए 50 सीटें निर्धारित की गई हैं। इस तरह शुरुआत में सभी छह केंद्रों को मिलाकर कुल 300 सीटें उपलब्ध होंगी। NCERT के विश्वविद्यालय बन जाने के बाद इन केंद्रों के कॉलेज के रूप में संचालित होने की बात कही गई है। ऐसी स्थिति में भविष्य में सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।कुल मिलाकर, NCERT का यह कदम स्कूलों में मार्गदर्शन और काउंसलिंग की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस कोर्स के जरिए शिक्षकों को विद्यार्थियों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने और उन्हें उचित दिशा दिखाने के लिए प्रशिक्षित करने की योजना है। इससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ उनके सामाजिक और भावनात्मक कल्याण पर भी ध्यान देने में मदद मिल सकती है।