कानपुर में SFI जिला सचिव आराध्य बाजपेयी जी का हाउस अरेस्ट जारी, आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात

समर्थकों की हिरासत भी जारी; SFI कानपुर ने तत्काल रिहाई और पुलिस कार्रवाई का कानूनी आधार सार्वजनिक करने की मांग की

कानपुर। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) कानपुर जिला कमेटी के अनुसार, संगठन के जिला सचिव एवं SFI उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी सदस्य आराध्य बाजपेयी जी को 9 अक्टूबर 2026 की शाम लगभग 7 बजे उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया गया। संगठन का कहना है कि 10 अक्टूबर को भी उन्हें घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है और अभी भी । सूत्रों के अनुसार, उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है।

SFI कानपुर से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, आराध्य बाजपेयी जी से मिलने पहुंचे उनके समर्थकों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। संगठन के अनुसार, उनके साथी अब भी हिरासत में हैं और आराध्य बाजपेयी जी का हाउस अरेस्ट भी जारी है। इस घटनाक्रम पर SFI कानपुर जिला कमेटी ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

हाउस अरेस्ट और हिरासत के कानूनी आधार पर सवाल

SFI कानपुर जिला कमेटी ने पुलिस प्रशासन से सवाल किया है कि आराध्य बाजपेयी जी को उनके आवास पर रोकने तथा उनसे मिलने पहुंचे साथियों को हिरासत में लेने का आदेश किस आधार पर दिया गया है। संगठन ने कार्रवाई के कारण, संबंधित आदेश और कानूनी आधार को स्पष्ट करने की मांग की है। SFI ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, छात्र अधिकारों और विश्वविद्यालयों से जुड़े सवालों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

संगठन के अनुसार, छात्र नेताओं और उनके साथियों को इस प्रकार रोकने की कार्रवाई गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रशासन को अपनी कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए और संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए। आराध्य बाजपेयी जी और हिरासत में लिए गए समर्थकों की तत्काल रिहाई की मांग

SFI कानपुर जिला कमेटी ने मांग की है कि आराध्य बाजपेयी जी को तत्काल हाउस अरेस्ट से मुक्त किया जाए तथा हिरासत में रखे गए उनके सभी समर्थकों को बिना देरी रिहा किया जाए। संगठन ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और कार्रवाई का कानूनी आधार स्पष्ट करने की मांग की है। SFI कानपुर ने कहा कि छात्र अधिकारों, शिक्षा और लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं से जुड़े सवालों को उठाना जारी रहेगा।

संगठन ने प्रशासन से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि छात्रों की लोकतांत्रिक गतिविधियों में अनुचित हस्तक्षेप न हो तथा उनके अधिकारों का सम्मान किया जाए।

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