KNEWS DESK- अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के पहले बैच की विदाई का समय नजदीक है। सेवा समाप्त होने पर उन्हें सेवा निधि पैकेज, स्किल सर्टिफिकेट और दोबारा नौकरी के लिए आरक्षण समेत कई प्रावधानों का लाभ मिल सकता है।
अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में चार साल के लिए भर्ती किए गए अग्निवीरों के पहले बैच की सेवा समाप्त होने का समय नजदीक आ रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, भारतीय नौसेना से अग्निवीरों का पहला बैच 21 नवंबर 2026 को सेवा से बाहर आएगा। योजना के प्रावधानों के अनुसार, चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से अधिकतम 25 फीसदी को नियमित सेवा में शामिल किया जा सकता है, जबकि शेष 75 फीसदी को सेवा से मुक्त किया जाएगा। ऐसे में सवाल है कि सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी और उनके लिए दोबारा नौकरी के क्या अवसर उपलब्ध होंगे।
चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को सेवा निधि पैकेज दिया जाता है। इसके अलावा उन्हें कौशल प्रमाणपत्र भी मिलता है, जिससे उन्हें आगे रोजगार तलाशने में मदद मिल सकती है। वहीं, सेवा के दौरान निर्धारित बीमा सुरक्षा भी योजना का हिस्सा है। हालांकि, पूर्व अग्निवीरों को सेवा समाप्त होने के बाद नियमित सैनिकों जैसी पेंशन और अन्य सभी सुविधाएं अपने आप नहीं मिलती हैं।
सेवा निधि पैकेज के तहत अग्निवीरों को लगभग 10.04 लाख रुपये मिलने का उल्लेख किया जा रहा है। इसमें अग्निवीर का योगदान, सरकार की ओर से बराबर का योगदान और लागू ब्याज शामिल होता है। इस राशि को टैक्स-फ्री बताया गया है। इसके साथ ही सेवा के दौरान 48 लाख रुपये का बीमा कवर भी निर्धारित है। हालांकि, बीमा कवर और सेवा समाप्ति पर मिलने वाली राशि अलग-अलग लाभ हैं। पूर्व अग्निवीरों को सेवा समाप्त होने के बाद मेडिकल और कैंटीन सुविधाएं नियमित सैनिकों की तरह मिलेंगी या नहीं, यह संबंधित नियमों और पात्रता पर निर्भर करेगा।
अग्निवीरों को सेवा के बाद रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स में कांस्टेबल जनरल ड्यूटी और राइफलमैन जैसे पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और आईटीबीपी जैसे बलों में भर्ती के दौरान इन प्रावधानों का लाभ संबंधित भर्ती नियमों के अनुसार दिया जाता है। आरक्षण का वास्तविक प्रतिशत और छूट की शर्तें संबंधित बल की अधिसूचना से तय होती हैं।
भर्ती प्रक्रिया में भी पूर्व अग्निवीरों को कुछ रियायतें देने के प्रावधान हैं। इनमें शारीरिक मानक परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण और लिखित परीक्षा से छूट जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन छूटों को सभी पदों और सभी भर्तियों पर समान रूप से लागू नहीं माना जा सकता। अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले संबंधित भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन देखना जरूरी होगा।
राज्य सरकारें भी पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में अवसर देने के लिए आरक्षण और आयु सीमा में छूट जैसे कदम उठा रही हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में इस दिशा में घोषणाएं की गई हैं। अलग-अलग राज्यों में आरक्षण का प्रतिशत, पदों की पात्रता और आयु सीमा में छूट के नियम अलग हो सकते हैं। पहले बैच के अग्निवीरों को आयु सीमा में अतिरिक्त छूट देने के प्रावधान भी संबंधित नियमों के अनुसार लागू हो सकते हैं।
पूर्व अग्निवीरों को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए गृह मंत्रालय की ओर से पोर्टल तैयार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसका उद्देश्य सेवा पूरी कर चुके अग्निवीरों को उपलब्ध नौकरियों और भर्ती के विकल्पों से जोड़ना है। हालांकि, पोर्टल की उपलब्धता और उसके जरिए मिलने वाली सुविधाओं की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से की जानी चाहिए।
इस बीच, तीनों सेनाओं में अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखने के अनुपात यानी रिटेंशन रेट को बढ़ाने पर विचार किए जाने की बात भी सामने आई है। मौजूदा व्यवस्था में अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल किया जा सकता है। इस अनुपात में किसी बदलाव के लिए आधिकारिक निर्णय जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, अग्निवीरों के पहले बैच की सेवा समाप्त होने के साथ उनके भविष्य के रोजगार, आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरियों में अवसरों पर ध्यान बढ़ेगा। सेवा निधि पैकेज और कौशल प्रमाणपत्र उन्हें आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं, जबकि आरक्षण और भर्ती में छूट के प्रावधान नए अवसर उपलब्ध करा सकते हैं। हालांकि, लाभों की अंतिम पात्रता और शर्तों के लिए संबंधित सरकारी आदेशों तथा भर्ती अधिसूचनाओं की जांच करना जरूरी है।