Knews Desk– हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के Physics 2 कोर्स के 194 छात्रों पर यह प्रयोग किया गया। यह कोर्स खास तौर पर लाइफ साइंस के छात्रों के लिए है। छात्रों को लगातार दो सप्ताह तक पढ़ाई के दो अलग-अलग तरीकों से सीखने का मौका दिया गया। एक सप्ताह छात्रों ने टीचर की गाइडेंस में एक्टिव लर्निंग की, जबकि दूसरे सप्ताह उन्होंने घर पर AI ट्यूटर की मदद से पढ़ाई की। इसके बाद छात्रों ने अपना स्टडी मेथड बदल लिया, ताकि दोनों तरीकों के अनुभव और सीखने के परिणामों की तुलना की जा सके।
रिसर्चर्स ने छात्रों की समझ का आकलन करने के लिए पढ़ाई से पहले और बाद में टेस्ट लिए। इसके साथ ही पढ़ाई के दौरान छात्रों की रुचि, प्रेरणा और सहभागिता को भी देखा गया। शुरुआती विश्लेषण में सामने आया कि AI ट्यूटर के साथ पढ़ने वाले छात्रों की सीखने की प्रगति कक्षा में एक्टिव लर्निंग करने वाले छात्रों की तुलना में लगभग दोगुनी रही। छात्रों ने AI के साथ पढ़ाई करते समय खुद को ज्यादा जुड़ा हुआ और प्रेरित महसूस करने की बात भी कही।
इस प्रयोग की एक खास बात यह थी कि छात्रों को सामान्य ChatGPT की खाली विंडो उपलब्ध नहीं कराई गई थी। रिसर्चर्स ने AI ट्यूटर को एक अनुभवी शिक्षक की तरह जवाब देने के लिए विशेष रूप से तैयार किया था। इसमें पहले से तैयार बातचीत, विषय से जुड़े संकेत और व्यवस्थित फीडबैक शामिल था। AI ट्यूटर को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह छात्रों की जरूरत और सीखने की गति के अनुसार उनके सवालों का जवाब दे सके।AI ट्यूटर के जरिए छात्रों को अपनी गति से पढ़ने का अवसर मिला। किसी विषय की जानकारी रखने वाला छात्र तेजी से आगे बढ़ सकता था, जबकि किसी कॉन्सेप्ट को समझने में कठिनाई महसूस करने वाला छात्र AI से ज्यादा सवाल पूछकर उसे समझ सकता था। इस तरह छात्रों को एक ही विषय को अपनी जरूरत के मुताबिक दोहराने और समझने का अवसर मिला।
हालांकि, रिसर्चर्स ने यह भी स्पष्ट किया कि AI का उद्देश्य शिक्षकों की जगह लेना नहीं होना चाहिए। AI का सही इस्तेमाल छात्रों की क्रिटिकल थिंकिंग और समझ को बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन अगर छात्र AI से खुद सोचने के बजाय हर सवाल का जवाब सीधे लेने लगें, तो इसका फायदा कम हो सकता है। इसलिए AI ट्यूटर को सीखने की प्रक्रिया में एक सहायक के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है।हार्वर्ड में किए गए इस प्रयोग के बाद AI ट्यूटर को दूसरे विषयों में भी इस्तेमाल करने की योजनाएं बनाई गई हैं। मल्टीवेरिएबल कैलकुलस और अन्य शुरुआती स्तर के कोर्स में भी इसके पायलट प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं। इस रिसर्च के शुरुआती नतीजे शिक्षा के क्षेत्र में AI की संभावनाओं को सामने रखते हैं, लेकिन इसके व्यापक प्रभावों को समझने के लिए अलग-अलग विषयों, छात्रों और लंबे समय तक किए जाने वाले अध्ययनों की जरूरत होगी।