समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपने दो उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन को उम्मीदवार बनाने पर सहमति जताई है। वहीं, तीसरी सीट के लिए सलीम शेरवानी के नाम पर भी चर्चा हुई है।
Knews Desk – समाजवादी पार्टी ने सोमवार को अपने विधायकों की बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर दो उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया। पहला नाम पार्टी के वरिष्ठ नेता और मौजूदा राज्यसभा सदस्य प्रोफेसर रामगोपाल यादव का है, जबकि दूसरा नाम पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन का है। आलोक रंजन को अखिलेश यादव का रणनीतिकार भी माना जाता रहा है।
बैठक में तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने को लेकर भी चर्चा हुई। इस दौरान सलीम शेरवानी के नाम पर भी विचार किया गया, लेकिन उनके नाम पर सहमति नहीं बन सकी। तीसरे उम्मीदवार को लेकर अखिलेश यादव ने कहा, “पहले विधायकों को तो लाइए, उसके बाद देखेंगे।”
दरअसल, उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। मौजूदा स्थिति में इनमें से आठ सीटें बीजेपी और दो सीटें समाजवादी पार्टी के पास हैं। ऐसे में सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारने की संभावित रणनीति ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि चुनाव को लेकर सभी सदस्यों से बातचीत हो चुकी है और जनता को एक बड़ा सरप्राइज मिलने वाला है।
सपा विधायकों की बैठक में रामगोपाल यादव को दोबारा राज्यसभा भेजने पर सहमति बनी। इसके अलावा पूर्व IAS अधिकारी आलोक रंजन के नाम पर भी सहमति जताई गई। सलीम शेरवानी के नाम पर एक बार फिर चर्चा हुई, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन सकी। सलीम शेरवानी के साथ आलोक रंजन भी पिछले चुनाव में हार चुके हैं।
कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद है। बीजेपी अपने दम पर सात सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि समाजवादी पार्टी के पास दो सीटें हासिल करने के लिए पर्याप्त संख्या बल है।
सपा की कोशिश अब तीसरी सीट के लिए भी उम्मीदवार उतारने की है। इसके लिए पार्टी को अपने मौजूदा संख्या बल के अलावा अन्य विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।
क्या है राज्यसभा चुनाव का गणित?
उत्तर प्रदेश विधानसभा में अभी 397 सदस्य हैं। ऐसे में एक उम्मीदवार को जीत के लिए करीब 37 फर्स्ट-प्रेफरेंस वोटों की जरूरत होगी। समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं। अगर कांग्रेस के दो विधायक भी सपा के साथ आते हैं तो विपक्षी खेमे के पास कुल 103 विधायक हो जाएंगे।
इस संख्या के आधार पर सपा के दो उम्मीदवारों के लिए जरूरी वोट आसानी से पूरे हो सकते हैं और करीब 25 वोट अतिरिक्त बच सकते हैं। इन्हीं अतिरिक्त वोटों को आधार बनाकर सपा तीसरा उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर विचार कर रही है।
हालांकि, तीसरे उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए सपा को अपने खेमे से बाहर भी समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट को लेकर आने वाले दिनों में सियासी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।