Knews Desk – इस विवाद के बीच विपक्ष के अलग-अलग नेताओं ने साल 2024 में 11 राज्यों में हुए चुनाव का मुद्दा उठा लिया है। विपक्ष इन 11 राज्यों में से 5 राज्यों में दोबारा चुनाव करने की मांग कर रहा है। इन राज्यों में बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली और हरियाणा का नाम शामिल है। ताजा विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ, जिसमें चुनाव आयुक्तों के बीच SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर आपत्तियों की बात सामने आई।
अलग-अलग दलों और नेताओं ने अलग-अलग राज्यों के चुनावों पर सवाल उठाए हैं। RJD नेता तेजस्वी यादव ने बिहार और बंगाल में नए चुनाव की मांग की है, जबकि महाराष्ट्र को लेकर उद्धव ठाकरे ने भी ताजा चुनाव की मांग रखी है। दिल्ली और हरियाणा को लेकर पहले से लगाए गए वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया संबंधी आरोपों को भी विपक्षी राजनीति में फिर उठाया जा रहा है। लेकिन सिर्फ आरोप लगने से चुनाव अपने आप रद्द नहीं हो जाते।
चुनाव को दोबारा कराने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। इसलिए असली सवाल यह है कि विपक्ष किन आधारों पर दोबारा चुनाव चाहता है और क्या इन आरोपों के आधार पर पूरे राज्य में फिर से मतदान कराया जा सकता है?
दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप आम आदमी पार्टी ने लगाया। हरियाणा में कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव से पहले 25 लाख गलत वोटर्स जोड़े गए और 27 सीटों पर ईवीएम में गड़बड़ी की गई। महाराष्ट्र में चुनाव से पहले 47 लाख ज्यादा वोट जोड़ने का आरोप लगाया गया। कांग्रेस का कहना है कि 50 विधानसभा सीटों में ऐसा किया गया।
बिहार में वोट हेराफेरी के अलावा विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने सांठगांठ करके 10 हजार रुपये चुनाव के बीच सरकार को देने दिया। वहीं बंगाल में टीएमसी का आरोप है कि 33 लाख वोटर्स के नाम काटे गए और उसे बीजेपी से 30 लाख वोट कम मिले हैं।
ताजा विवाद चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट के बाद बढ़ा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। विपक्ष ने इसे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का आधार बनाया। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि किसी संवैधानिक संस्था में सुझाव, आपत्तियां और आंतरिक चर्चा सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने कहा कि अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए और सभी आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी हुए।
बिहार में 2025 में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। ताजा विवाद में RJD नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों ने विपक्ष को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने बिहार में दोबारा चुनाव कराने की मांग की है। तेजस्वी ने चुनाव से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की अवधि में बदलाव पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे चुनावी अनियमितताओं को अदालत में चुनौती देना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने चुनाव के दौरान महिलाओं के खातों में 10 हजार रुपये भेजे जाने को लेकर भी सवाल उठाया। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, इन आरोपों को चुनाव आयोग ने स्वीकार नहीं किया है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि SIR के दौरान 33 लाख नाम हटाए गए और बड़ी संख्या में लोगों ने अपने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपील की। आयोग के अनुसार, 38 लाख से ज्यादा अपीलें दाखिल हुई हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि वोटर लिस्ट में नाम हटने का असर चुनावी नतीजों पर पड़ा। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट मतदाता जैसी श्रेणियां शामिल थीं और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत हुई।
महाराष्ट्र में 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद विपक्षी दलों ने वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। अब ताजा राजनीतिक विवाद में शिवसेना (UBT) नेता उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों में दोबारा चुनाव कराने की मांग रखी है।
दिल्ली में भी वोटर लिस्ट को लेकर विवाद जारी है। 2026 में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली में logical discrepancies के आधार पर जारी नोटिसों को लेकर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।
आप ने नई दिल्ली, शाहदरा, संगम विहार और आरके पुरम समेत 5 विधानसभा सीटों पर वोटरों के नाम काटने और फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ने का आरोप लगाया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप को 22 सीटों पर जीत मिली, जबकि बीजेपी ने 48 सीटें जीतीं। दिल्ली विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं।
हरियाणा में 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने वोटर लिस्ट और EVM से जुड़े आरोप लगाए थे। पश्चिम बंगाल के मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि चुनाव को चुनौती देने के लिए Representation of the People चुनाव की मांग राजनीतिक विवाद का हिस्सा है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इन राज्यों में चुनाव रद्द हो गए हैं या फिर से मतदान तय हो गया है।
सिर्फ किसी पार्टी के मांग करने से पूरे राज्य में दोबारा चुनाव नहीं कराया जा सकता। चुनाव नतीजों को चुनौती देने के लिए कानून में तय प्रक्रिया है। किसी चुनाव में गंभीर अनियमितता साबित होने पर संबंधित कानूनी प्राधिकरण या अदालत के आदेश से चुनाव को प्रभावित करने वाली कार्रवाई हो सकती है। यही वजह है कि विपक्ष ने दोबारा चुनाव मांगा और दोबारा चुनाव होने जा रहा है, इन दोनों बातों में बड़ा अंतर है।