Azamgarh Murder Case: आजमगढ़ के शंभूपुर गहजी गांव में महामृत्युंजय पाठ के दौरान विवाद के बाद अरविंद सिंह ने अपनी पत्नी बबीता, बेटे और पूजा कराने आए दो पुरोहितों पर गोली चला दी। इसके बाद वह अपने तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद हो गया। पुलिस ने करीब सात घंटे तक उसे समझाने की कोशिश की और फिर ऑपरेशन चलाकर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।
Knews Desk– उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में शंभूपुर गहजी गांव में हुए हत्याकांड से सनसनी फैल गई। घर में महामृत्युंजय पाठ चल रहा था, तभी अरविंद सिंह और पूजा कराने आए पुरोहितों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद अरविंद ने अपनी लाइसेंसी राइफल से पत्नी बबीता सिंह, दो पुरोहितों और बेटे को गोली मार दी। घटना के बाद वह अपने तीन बच्चों के साथ घर के एक कमरे में बंद हो गया।
परिवार के मुताबिक, अरविंद के भाई सुनील सिंह की पहले हत्या हुई थी। उसकी आत्मा की शांति के लिए घर में महामृत्युंजय पाठ कराया जा रहा था। इस दौरान पुरोहित महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा पूजा करा रहे थे। इसी बीच अरविंद बाजार से घर पहुंचा और उसने पूजा होते देख दोनों पुरोहितों से सवाल-जवाब शुरू कर दिया। आरोप है कि उसने पुरोहितों से आधार कार्ड भी मांगा। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया।
विवाद के दौरान अरविंद का गुस्सा बढ़ गया। वह घर के अंदर गया और लाइसेंसी राइफल लेकर बाहर आया। आरोप है कि उसने सबसे पहले अपनी पत्नी बबीता को गोली मारी। इसके बाद उसने पूजा करा रहे दोनों पुरोहितों पर भी फायरिंग कर दी। गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे। भीड़ बढ़ती देख अरविंद अपने तीन बच्चों के साथ एक कमरे में चला गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मकान को घेर लिया। अधिकारियों ने अरविंद को बाहर आकर सरेंडर करने के लिए समझाने का प्रयास किया। ADG नवीन अरोड़ा के मुताबिक, पुलिस ने रिश्तेदारों और अधिकारियों के माध्यम से भी उससे लगातार बातचीत की, लेकिन वह कमरे से बाहर आने के लिए तैयार नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार, अरविंद बच्चों को अपनी ढाल बताते हुए लगातार पुलिस को पीछे हटने के लिए कह रहा था।
करीब सात घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद पुलिस को आशंका हुई कि अंदर मौजूद बच्चों की जान खतरे में हो सकती है। पुलिस टीम ने स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया और दरवाजा तोड़कर कमरे के अंदर प्रवेश किया।
पुलिस के मुताबिक, टीम के कमरे में पहुंचते ही अरविंद ने कई राउंड फायरिंग की। उस समय उसकी बड़ी बेटी उसके सामने थी, जबकि छोटी बेटी उसके हाथ से नीचे गिर गई। पुलिस के अनुसार, बेटे को पहले ही गोली लग चुकी थी। बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश के दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हो गया।
अरविंद और उसके घायल बेटे को अस्पताल ले जाया गया, जहां दोनों की मौत हो गई। इस पूरे घटनाक्रम में अरविंद, उसकी पत्नी बबीता, दोनों पुरोहितों और उसके बेटे समेत कुल पांच लोगों की मौत हुई। वहीं, उसकी दो बेटियों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटनास्थल पर फॉरेंसिक और SOG की टीम साक्ष्य जुटाने में लगी है।