KNEWS DESK- सितंबर का महीना मानसून के खत्म होने और मौसम में बदलाव का समय होता है। दिन में गर्मी और सुबह-शाम हल्की ठंडक के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इस दौरान बच्चों में सर्दी, खांसी, गले में खराश और बुखार जैसी मौसमी समस्याएं आम हो सकती हैं। बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए उनकी डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करना जरूरी है, जिनसे उन्हें पर्याप्त विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्व मिल सकें।
बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत रखने के लिए केवल किसी एक फूड पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित और विविध आहार देना बेहतर माना जाता है। फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, डेयरी और नट्स जैसे पोषक खाद्य पदार्थ बच्चों की रोजाना की डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। वहीं बहुत ज्यादा पैकेज्ड, प्रोसेस्ड और जंक फूड का सेवन सीमित करना भी फायदेमंद हो सकता है।
बच्चों की डाइट में दही या सादा योगर्ट शामिल किया जा सकता है। दही में प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों की सेहत को सपोर्ट कर सकते हैं। अच्छी गट हेल्थ का शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से भी संबंध माना जाता है। अगर बच्चा डेयरी उत्पाद आसानी से पचा लेता है, तो उसकी उम्र और जरूरत के अनुसार दही को नियमित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
लहसुन भी खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ कई पोषक तत्व और बायोएक्टिव कंपाउंड प्रदान करता है। इसमें एलिसिन नामक यौगिक पाया जाता है। बच्चों के भोजन में उचित मात्रा में लहसुन का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इसे किसी बीमारी का इलाज या संक्रमण से बचाने की गारंटी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
विटामिन सी से भरपूर फल भी बच्चों की डाइट का अच्छा हिस्सा हो सकते हैं। संतरा, मौसमी, अमरूद, कीवी और आंवला जैसे फलों में विटामिन सी पाया जाता है। इसके अलावा अलग-अलग मौसमी फलों से बच्चों को कई तरह के विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट मिल सकते हैं। कोशिश करें कि बच्चों को पैकेज्ड जूस की जगह पूरा फल खिलाया जाए, ताकि फाइबर भी मिल सके।
हल्दी का इस्तेमाल भारतीय खानपान में लंबे समय से किया जाता रहा है। दूध में थोड़ी मात्रा में हल्दी मिलाकर देना कई घरों में पारंपरिक तौर पर अपनाया जाता है। हालांकि बच्चों को हल्दी वाला दूध देते समय उनकी उम्र, पसंद और किसी संभावित एलर्जी या स्वास्थ्य समस्या का ध्यान रखना चाहिए। इसे किसी वायरल संक्रमण या बीमारी की दवा नहीं माना जाना चाहिए।
बादाम और दूसरे नट्स भी बच्चों की संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। बादाम में विटामिन ई, हेल्दी फैट्स, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। छोटे बच्चों को बादाम या किसी भी नट्स देते समय उन्हें अच्छी तरह पीसकर या उम्र के अनुसार सुरक्षित तरीके से देना चाहिए, क्योंकि साबुत नट्स छोटे बच्चों में गले में फंसने का खतरा पैदा कर सकते हैं।
बच्चों की इम्यूनिटी को सपोर्ट करने के लिए केवल कुछ खास खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। पौष्टिक भोजन के साथ पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, साफ-सफाई और पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। अगर बच्चे को लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी या बार-बार गंभीर संक्रमण जैसी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।