KNEWS DESK- पेट्रोल की कीमतों के चलते कार चलाने का मासिक खर्च कई लोगों के बजट पर असर डालता है। ऐसे में पेट्रोल कार में CNG किट लगवाना एक विकल्प हो सकता है। CNG पर कार चलाने की लागत कई मामलों में पेट्रोल की तुलना में कम पड़ सकती है, खासकर तब जब कार का इस्तेमाल रोजाना लंबी दूरी तय करने के लिए किया जाता हो।
हालांकि, पेट्रोल कार में आफ्टरमार्केट CNG किट लगवाने का फैसला केवल फ्यूल की कीमत देखकर नहीं करना चाहिए। कार का मॉडल, इंजन की तकनीक, किट की क्वालिटी, फिटमेंट सेंटर और आपकी मासिक ड्राइविंग सभी चीजें इस फैसले को प्रभावित करती हैं।
CNG किट लगवाने में कितना खर्च आएगा?
पेट्रोल कार में CNG किट लगवाने का खर्च कार और इस्तेमाल की जाने वाली किट पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर अच्छी क्वालिटी वाली सीक्वेंशियल CNG किट और उसके फिटमेंट पर करीब 35 हजार से 55 हजार रुपये या उससे अधिक खर्च हो सकता है। अलग-अलग कार मॉडल और किट के अनुसार कीमत में अंतर हो सकता है। अगर आपकी कार हर महीने ज्यादा किलोमीटर चलती है, तो CNG से फ्यूल लागत में होने वाली संभावित बचत शुरुआती किट की कीमत की भरपाई करने में मदद कर सकती है। वहीं, कम चलने वाली कार में यह लागत वसूल होने में काफी समय लग सकता है।
मासिक रनिंग का हिसाब लगाना जरूरी
CNG किट लगवाने से पहले अपनी कार की औसत मासिक रनिंग निकालें। इसके बाद पेट्रोल और CNG पर प्रति किलोमीटर आने वाले अनुमानित खर्च की तुलना करें। इस अंतर से यह समझने में मदद मिलेगी कि किट पर किया गया शुरुआती खर्च कितने समय में रिकवर हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर कार रोजाना ऑफिस आने-जाने या व्यावसायिक इस्तेमाल में काफी दूरी तय करती है, तो कम प्रति किलोमीटर ईंधन लागत का फायदा ज्यादा दिखाई दे सकता है। लेकिन अगर कार कभी-कभार ही इस्तेमाल होती है, तो कन्वर्जन का आर्थिक फायदा सीमित हो सकता है।
कार के इंजन की अनुकूलता जांचें
हर पेट्रोल कार में किसी भी CNG किट को लगाना सही नहीं होता। किट खरीदने से पहले यह पता करना जरूरी है कि आपकी कार का इंजन संबंधित CNG सिस्टम के साथ संगत है या नहीं। आधुनिक कारों में इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल सिस्टम और इंजन मैनेजमेंट की वजह से सही किट और सही कैलिब्रेशन का महत्व और बढ़ जाता है। CNG सिस्टम में सिलेंडर, रेगुलेटर, गैस पाइप, इंजेक्टर, फिलिंग वाल्व और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम जैसे कई हिस्से शामिल होते हैं। इन सभी की फिटिंग कार के मॉडल और इंजन के अनुसार सही तरीके से होनी चाहिए।
डिग्गी की जगह हो सकती है कम
CNG किट का एक बड़ा असर कार के बूट स्पेस पर पड़ सकता है। CNG सिलेंडर आमतौर पर डिग्गी में लगाया जाता है, जिससे सामान रखने की जगह कम हो जाती है। अगर आप परिवार के साथ अक्सर लंबी यात्राएं करते हैं या डिग्गी में ज्यादा सामान रखते हैं, तो कन्वर्जन से पहले इस पहलू पर भी विचार करें।
पावर और ड्राइविंग में महसूस हो सकता है अंतर
CNG पर चलने वाली कार में पेट्रोल की तुलना में पावर और पिकअप में कुछ अंतर महसूस हो सकता है। यह अंतर कार के इंजन, किट और ट्यूनिंग पर निर्भर करता है। खासकर तेज एक्सीलरेशन या कार में ज्यादा वजन होने पर इसका अनुभव हो सकता है। सही किट और उचित फिटमेंट होने पर सामान्य रोजमर्रा की ड्राइविंग की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।
फिटमेंट और सुरक्षा से समझौता न करें
CNG किट लगवाते समय केवल कम कीमत देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। फिटमेंट किसी प्रशिक्षित और भरोसेमंद सेंटर से करवाना जरूरी है। गलत इंस्टॉलेशन या खराब क्वालिटी के पार्ट्स से कार की परफॉर्मेंस और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं। किट लगवाने के बाद सिलेंडर, पाइपलाइन, वाल्व और अन्य कनेक्शन की समय-समय पर जांच करवाते रहें। अगर कार के अंदर या आसपास CNG की गंध महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से सिस्टम की जांच करवाएं।
कागजात और नियमों की भी रखें जानकारी
पेट्रोल कार में आफ्टरमार्केट CNG किट लगवाने के बाद जरूरी दस्तावेज और वाहन के रिकॉर्ड में बदलाव से जुड़े स्थानीय नियमों का पालन करना भी जरूरी है। कन्वर्जन कराने से पहले अधिकृत फिटमेंट सेंटर और संबंधित परिवहन विभाग से मौजूदा प्रक्रिया की जानकारी ले लें।
इसलिए पेट्रोल कार में CNG किट लगवाने का फैसला आपकी कार की तकनीकी अनुकूलता, मासिक रनिंग, शुरुआती खर्च, बूट स्पेस और फिटमेंट की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर करना चाहिए। केवल CNG की कम ईंधन लागत देखकर तुरंत किट लगवाने के बजाय पहले पूरा खर्च और संभावित बचत का हिसाब करना ज्यादा उपयोगी रहेगा।