Knews Desk- चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक विवाद के बीच दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ सिंबल मिला है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया है।
निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को लेकर शुक्रवार को नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए। आयोग के फैसले के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है और उसके लिए ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न निर्धारित किया गया है। वहीं ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है।
यह फैसला तृणमूल कांग्रेस के नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है। इससे पहले 17 सितंबर को चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ प्रतीक के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग ने कहा था कि अंतिम फैसला होने तक दोनों पक्षों को अलग नाम और चिह्न के साथ चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेना होगा।
आयोग के इस अंतरिम कदम का संबंध आगामी उपचुनावों से भी है। रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों तथा असम की नगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनावों से पहले दोनों गुटों को नए नाम और प्रतीक चुनने को कहा गया था। दोनों पक्षों को तीन-तीन नाम और उपलब्ध चुनाव चिह्नों में से तीन-तीन विकल्प देने का निर्देश दिया गया था।
आयोग के निर्देश के बाद दोनों गुटों ने शुक्रवार सुबह तय समय सीमा के भीतर अपने विकल्प सौंपे। इसके बाद चुनाव आयोग ने प्रत्येक गुट के लिए एक नाम और एक चुनाव चिह्न आवंटित किया। अब संबंधित उपचुनावों में दोनों गुट इन्हीं आवंटित पहचान के साथ चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और पार्टी की पहचान को लेकर सामने आए मतभेदों से हुई। दोनों पक्षों ने पार्टी के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश किया था। विवाद के अंतिम समाधान तक आयोग ने मूल नाम और प्रतीक को रोककर दोनों पक्षों के लिए अलग अस्थायी पहचान तय की है।
अब आयोग के सामने मूल पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। तब तक दोनों गुटों के लिए शुक्रवार को आवंटित नए नाम और चुनाव चिह्न लागू रहेंगे।