गणपति बप्पा की विदाई के दौरान कुछ धार्मिक परंपराओं और सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है. उत्तर पूजा से लेकर विसर्जन तक जानिए किन बातों का पालन करना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए.
Knews Desk- गणेश उत्सव का समापन इस साल 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा. 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुए इस पर्व में भक्तों ने घरों और पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना कर पूजा-अर्चना की. अब श्रद्धालु अपनी परंपराओं के अनुसार बप्पा को विदाई देने की तैयारी कर रहे हैं. गणपति विसर्जन को सिर्फ प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि श्रद्धा और सम्मान के साथ भगवान गणेश को विदा करने का अवसर माना जाता है. ऐसे में विसर्जन से पहले और उसके दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणपति विसर्जन से पहले उत्तर पूजा करने की परंपरा है. इस दौरान भगवान गणेश की पूजा कर उन्हें भोग अर्पित किया जाता है. भक्त परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं. पूजा के बाद कई स्थानों पर गणपति की प्रतिमा को उसके मूल स्थान से थोड़ा आगे खिसकाने की परंपरा भी निभाई जाती है. इसे बप्पा की विदाई की शुरुआत के तौर पर देखा जाता है.
आरती और भोग के बाद दें विदाई
गणपति बप्पा को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले उनकी आरती करनी चाहिए. फूल, दूर्वा, मोदक और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य भोग अर्पित किए जा सकते हैं. इसके बाद भगवान गणेश से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगने की परंपरा है. परिवार के सदस्य मिलकर बप्पा को सम्मानपूर्वक विदा करें और इस दौरान गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ जैसे जयकारे लगाए जा सकते हैं.
विसर्जन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
गणपति विसर्जन के समय जल्दबाजी और लापरवाही से बचना चाहिए. प्रतिमा को सावधानी से उठाकर ले जाएं और विसर्जन के दौरान श्रद्धा एवं मर्यादा बनाए रखें. धार्मिक परंपराओं के साथ पर्यावरण की सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है. इसलिए प्रतिमा का विसर्जन निर्धारित स्थान या कृत्रिम विसर्जन कुंड में करें, ताकि जल प्रदूषण न हो और प्रकृति को नुकसान से बचाया जा सके.
गणपति विसर्जन परिवार और भक्तों के साथ मिलकर करने की परंपरा है. कोशिश करनी चाहिए कि घर के सदस्य बप्पा की विदाई में शामिल हों. हालांकि, किसी कारण से सभी का साथ जाना संभव न हो तो श्रद्धा और सम्मान के साथ विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है. सबसे जरूरी बात यह है कि भगवान गणेश को पूरे आदर और भक्ति के साथ विदाई दी जाए.