KNEWS DESK- इस बार 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक साथ मनाया जाएगा. दोनों व्रतों को लेकर श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल हैं. जानिए क्या दोनों व्रत अलग-अलग रखने होंगे, पूजा का शुभ समय क्या है और पारण कब किया जाएगा.
धार्मिक दृष्टि से 14 सितंबर 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण है. इस दिन सुहागिन महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी, जबकि गणेश भक्त भगवान गणेश की आराधना कर सुख-समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति की कामना करेंगे.
दो प्रमुख व्रत एक ही दिन पड़ने के कारण यह सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों के लिए अलग-अलग उपवास करना जरूरी है? हरतालिका तीज की पूजा किस समय होगी और गणपति स्थापना के लिए कौन सा मुहूर्त शुभ रहेगा? आइए, जानते हैं इस दिन का पूरा धार्मिक कार्यक्रम.
सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी तृतीया तिथि
पंचांग के अनुसार, 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी. इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी. ऐसे में हरतालिका तीज की मुख्य पूजा तृतीया तिथि के दौरान करना शुभ माना जाता है. व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान करके पूजा की तैयारी कर सकती हैं. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ हरतालिका तीज की कथा सुनने और सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है.
क्या एक ही उपवास से दोनों व्रत पूरे होंगे?
हरतालिका तीज को कठिन व्रतों में गिना जाता है. कई महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास रखती हैं और पूरे दिन अन्न-जल का त्याग करती हैं. यदि कोई महिला हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रख रही है, तो उसी दिन गणेश चतुर्थी का व्रत भी रखा जा सकता है. इसके लिए सुबह दोनों व्रतों का संकल्प लिया जा सकता है. अलग-अलग उपवास करने की आवश्यकता नहीं मानी जाती, क्योंकि दोनों व्रत एक ही दिन पड़ रहे हैं. हालांकि, व्रत रखने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. निर्जला व्रत कठिन हो सकता है, इसलिए स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर धार्मिक परंपरा के अनुसार अपनी क्षमता के मुताबिक व्रत रखना चाहिए.
हरतालिका तीज की पूजा का शुभ समय
14 सितंबर को हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह 6 बजकर 5 मिनट से 7 बजकर 6 मिनट तक का समय बताया गया है. इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना शुभ रहेगा. पूजा के लिए सबसे पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा स्थल को सजाएं और मिट्टी या रेत से भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करें. माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें, जबकि भगवान शिव को बेलपत्र, फूल और फल चढ़ाएं. पूजा के बाद हरतालिका तीज की कथा पढ़ें या सुनें. साथ ही सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करें.
दोपहर में स्थापित होंगे गणपति बप्पा
हरतालिका तीज की सुबह की पूजा के बाद दोपहर में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा सकता है. 14 सितंबर को गणपति स्थापना के लिए सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक का शुभ मुहूर्त बताया गया है. इस दौरान घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें. गणपति बप्पा को दूर्वा, लाल फूल, मोदक और फल अर्पित करें. इसके बाद विधि-विधान से पूजा करें और गणेश चतुर्थी की कथा का पाठ या श्रवण करें.
शाम को भी होगी शिव-पार्वती की आराधना
हरतालिका तीज की पूजा सुबह के समय करने के साथ शाम को भी भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जाती है. 14 सितंबर को शाम 6 बजकर 28 मिनट से 7 बजकर 37 मिनट तक पूजा का शुभ समय बताया गया है. इस दौरान शिव-पार्वती की आरती करें और व्रत कथा सुनें. हरतालिका तीज पर रात में जागरण करने की भी परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने पर दांपत्य जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
15 सितंबर को होगा दोनों व्रतों का पारण
हरतालिका तीज का व्रत तृतीया तिथि समाप्त होते ही नहीं खोला जाता. इस व्रत का पारण अगले दिन यानी 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद किया जाएगा. गणेश चतुर्थी का व्रत भी इसी दिन खोला जा सकता है. इस तरह 14 सितंबर को दोनों पर्व एक साथ मनाए जाएंगे और व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन विधि के अनुसार पारण करेंगे.
एक नजर में शुभ मुहूर्त
- हरतालिका तीज की मुख्य पूजा: सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक.
- गणपति स्थापना: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक.
- शाम की शिव-पार्वती पूजा: शाम 6:28 बजे से 7:37 बजे तक.
- दोनों व्रतों का पारण: 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद.
ध्यान दें कि पूजा और पारण के मुहूर्त स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं. इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर लेना उचित रहेगा.