KNEWS DESK – नई दिल्ली में BRICS संयुक्त घोषणा पत्र अपनाए जाने के बाद भारत को एक और बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। भारत ने BRICS समिट के मंच पर पहली बार ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं को एक साथ लाने में कामयाबी हासिल की।
शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने नई दिल्ली में BRICS समिट के दौरान अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। शेख खालिद ने इस बैठक में UAE का प्रतिनिधित्व किया।
पश्चिम एशिया के तनाव के बीच अहम मुलाकात
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और दोनों पक्षों के बीच मतभेदों के बीच हुई यह मुलाकात भारत की कूटनीतिक पहल के तौर पर देखी जा रही है। BRICS समिट में अपने संबोधन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने मंच से एकतरफा और अमानवीय प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने की अपील की।
पेजेशकियन ने कहा कि BRICS को न्याय के लिए आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने सदस्य देशों से नागरिक बुनियादी ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों को सामान्य मानने की प्रवृत्ति के खिलाफ खड़े होने का आग्रह किया।
ईरानी राष्ट्रपति के मुताबिक, ऐसी साइटों पर किसी भी तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।
फिलिस्तीन मुद्दे पर BRICS से सक्रिय भूमिका की अपील
पेजेशकियन ने फिलिस्तीन के मुद्दे और फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि यह वैश्विक शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता और वैधता की गंभीर परीक्षा है।
उन्होंने BRICS से इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में ठोस प्रयास किए जा सकें।
BRICS ने अपनाया नई दिल्ली घोषणा पत्र
इससे पहले BRICS देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026 को मंजूरी दी। इसमें पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई गई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई।
घोषणा पत्र में देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के पालन पर जोर दिया गया।
BRICS देशों ने बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान तलाशने की आवश्यकता बताई। साथ ही, क्षेत्र में लंबे समय तक शांति, सुरक्षा और स्थिरता स्थापित करने के लिए प्रयास तेज करने की अपील की गई।
व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी जोर
घोषणा पत्र में वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा के सुचारु प्रवाह को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
ईरान और UAE के नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत संवाद और कूटनीति के जरिए क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है।