उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड की सियासत में चुनाव से पहले एक बार फिर ED की कार्रवाई ने राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है। UKSSSC की VPDO परीक्षा 2016 में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में देहरादून में ED की छापेमारी के बाद अब जांच के साथ साथ सियासी सवाल भी खड़े होने लगे हैं। खास तौर पर इसलिए क्योंकि ED की कार्रवाई के दायरे में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी रहे चंदन सिंह जीना का आवास भी शामिल रहा। 10 सितंबर को हुई तलाशी में जीना के आवास से करीब 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, लगभग 200 ग्राम सोना और 12 लग्जरी घड़ियां बरामद होने की बात सामने आई है। जिसके बाद भाजपा को कांग्रेस पर हमला बोलने का मौका मिला है,वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पूरे मामले पर जांच का इंतजार करने की बात कही है। हरीश रावत के अनुसार जीना सज्जन और कर्मठ व्यक्ति है और अगर भर्ती व जीना के सम्बन्ध में गड़बड़ी के प्रमाण मिलते हैं तो कार्रवाई भी होनी चाहिए। लेकिन सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश तब सामने आया, जब रावत ने कांग्रेस के दो पदों से हटने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उनका मानना यह भी है, कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष को कोई कमजोरी नहीं आनी चाहिए। ऐसे में ED की कार्रवाई अब सिर्फ जांच का मामला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सियासत में कांग्रेस बनाम भाजपा की नई राजनीतिक बहस का मुद्दा बनती नजर आ रही है। जिसके चलते आरोप प्रत्यारोप जमकर देखा जा रहा है।
एक बार फिर चुनाव से पहले उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस को बड़ा झटका लगता नजर आ रहा है.जब ईडी ने UKSSSC VPDO एग्जाम 2016 में हुई गड़बड़ियों के मामले में पूर्व सीएम हरीश रावत के वर्तमान पीए और पूर्व ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापा मारकर भारी मात्रा में कैश सोने के सिक्के, चेन और महंगी घड़ियां बरामद की.जिस पर हरीश रावत ने अपने सोशल मिडिया एकॉउंट पर एक पोस्ट कर प्रदेश की राजनीति को ओर गरमा दिया है.ऐसे समय में हरीश रावत ने कहा कि जब कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर लड़ रही है तो, ऐसे में किसी भी कृत्य से यदि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी आती है, तो वे ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे. इसलिए उन्होंने अपने ईष्ट देवता का स्मरण करके एक बड़ा निर्णय लिया है, कि वे उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से बहुत विनम्रता पूर्वक हटना चाहेंगे, क्योंकि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी उनकी वजह से नहीं आनी चाहिए.वही भाजपा हरीश रावत के बयान पर तंज कसती नजर आ रही है,जिसे दबाव की राजनीति करार कर रही है.
कुल मिलाकर, ED द्वारा की गई इस छापेमारी ने उत्तराखंड में एक बार फिर भर्ती घोटालों की फाइल खोल दी है। VPDO परीक्षा 2016 के इस मामले में 32 लाख कैश, सोना और लग्जरी घड़ियों की बरामदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। राजनीतिक तौर पर देखें तो भाजपा इसे कांग्रेस के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार के सबूत के तौर पर पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे जांच पूरी होने तक राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है। वही हरीश रावत का दो पदों से इस्तीफा देने की बात कहना इस पूरे मामले को और बड़ा बना देता है। उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की है कि पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई से पीछे नहीं हटेगी, चाहे जांच अपनों के खिलाफ ही क्यों न हो। ऐसे में अब सबकी नजरें ED की अगली कार्रवाई और सरकार के रुख पर टिकी हैं, और जांच में और कौन से बड़े नाम सामने आते है। इस सबका खुलासा आने वाले दिनों में होगा।