चिक्कबल्लापुर में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर का मामला सामने आया है. जांच रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है.
Knews Desk- कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में सरकारी झील की जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कराने का मामला सामने आया है. करीब 24 एकड़ में फैली इस जमीन की बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है. मामले की जांच पूरी होने के बाद कई अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं.
यह मामला चिक्कबल्लापुर तालुक के कसबा होबली स्थित अनकनूर गांव का है. यहां सर्वे नंबर 109 में अमाणिगोपालकृष्ण केरे नाम की सरकारी झील मौजूद है. करीब 24 एकड़ में फैली यह जमीन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है. बताया गया है कि यह जमीन नगर निकाय के अधिकार क्षेत्र में भी नहीं आती.
आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दस्तावेजों में कथित हेरफेर किया और सरकारी जमीन को निजी व्यक्ति के नाम दर्ज करा दिया. इस मामले ने सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और राजस्व रिकॉर्ड की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कई अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में
जांच रिपोर्ट में नगरसभा के पौरायुक्त मंसूर अली, कर वसूली अधिकारी वेंकटेश, राजस्व निरीक्षक वी.आर. वेंकटेश और सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारी नटराज की भूमिका का उल्लेख किया गया है. इन अधिकारियों पर सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में कथित अनियमितताएं करने के आरोप हैं.
टीवी9 की रिपोर्ट के बाद चिक्कबल्लापुर के उपायुक्त प्रभु जी. ने मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की थी. जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी है.
जांच रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है. इस संबंध में राज्य सरकार को रिपोर्ट भेज दी गई है. अब आगे की कार्रवाई सरकार के स्तर पर होनी है.
शिकायतकर्ता ने उठाए प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता और शिकायतकर्ता अमीर मोहम्मद सादिक ने प्रशासन की कार्रवाई को अपर्याप्त बताया है. उनका कहना है कि पौरायुक्त को छोड़कर अन्य अधिकारियों को उपायुक्त अपने स्तर पर निलंबित कर सकते थे. उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने की भी मांग की है.
सादिक के मुताबिक, केवल सरकार को कार्रवाई की सिफारिश भेजना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग को लेकर वह कर्नाटक हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे.
सरकारी जमीन बचाने की मांग
मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है. लोगों का कहना है कि सरकारी झील की जमीन को कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी हाथों में सौंपने का प्रयास गंभीर मामला है. उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और सरकारी जमीन को सुरक्षित किया जाए.