Masik Shivratri 2026: आज है भाद्रपद की मासिक शिवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और सही विधि

KNEWS DESK- भगवान शिव की आराधना के लिए मासिक शिवरात्रि का दिन बेहद खास माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और रात में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। भाद्रपद मास की मासिक शिवरात्रि आज यानी 9 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि पर सच्चे मन से महादेव की पूजा करने और शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। माना जाता है कि इस दिन भोलेनाथ की आराधना करने से जीवन की परेशानियों से राहत और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

9 सितंबर को ही क्यों मनाई जा रही मासिक शिवरात्रि?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की चतुर्दशी तिथि 9 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे शुरू हो रही है और इसका समापन 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे होगा। मासिक शिवरात्रि की पूजा में निशीथ काल का विशेष महत्व माना जाता है। चूंकि निशीथ काल 9 सितंबर की रात में पड़ रहा है, इसलिए इस बार मासिक शिवरात्रि का व्रत 9 सितंबर को रखा जा रहा है।

निशीथ काल में करें महादेव की पूजा

मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा के लिए निशीथ काल को सबसे शुभ समय माना जाता है। 9 सितंबर की रात निशीथ काल रात 11:55 बजे से शुरू होकर देर रात 12:41 बजे तक रहेगा। इस दौरान शिवलिंग का अभिषेक करना और भगवान शिव का ध्यान करना विशेष फलदायी माना जाता है। भक्त इस समय शिव मंत्रों का जाप और आरती भी कर सकते हैं।

शिव पूजा से दूर होते हैं संकट?

धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव को भोलेनाथ कहा गया है। माना जाता है कि महादेव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न हो जाते हैं। मासिक शिवरात्रि पर व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से मन को शांति मिलती है। भक्त इस दिन महादेव से अपने जीवन की परेशानियों और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करना भी विशेष माना जाता है।

मासिक शिवरात्रि पर कैसे करें पूजा?

मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शाम या रात के समय पूजा की तैयारी करें। सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक किया जा सकता है। अंत में साफ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और भगवान शिव की आरती करें। इसके बाद अपनी मनोकामना रखते हुए महादेव से सुख-शांति और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करें।

मासिक शिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा-अर्चना करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति मिलती है और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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