Knews Desk- अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को लेकर अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बड़ा अनुमान जताया है। उनका कहना है कि ईरान के साथ मौजूदा सैन्य तनाव खत्म होने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई अचानक बढ़ सकती है। अगर ऐसा हुआ तो क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है और यह 40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकता है।
फिलहाल भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि WTI क्रूड करीब 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। ऐसे में 40 डॉलर तक की संभावित गिरावट तेल बाजार के लिए बड़ा बदलाव होगी।
बाजार में बढ़ सकती है तेल की सप्लाई
स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान संकट समाप्त होने के बाद तेल बाजार में ओवरसप्लाई की स्थिति बन सकती है। उनके मुताबिक, बड़ी मात्रा में उत्पादन बाजार में आने की संभावना है। इससे मांग की तुलना में सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव बनेगा।
बेसेंट का अनुमान है कि ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमत 40 से 50 डॉलर प्रति बैरल के बीच आ सकती है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान से जुड़ा मौजूदा सैन्य विवाद कब समाप्त होगा।
सस्ता तेल घटा सकता है महंगाई का दबाव
अगर कच्चे तेल की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट आती है तो इसका असर सिर्फ ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कमी से परिवहन और उत्पादन लागत घट सकती है, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है।
बेसेंट के मुताबिक, तेल की कीमतों और ब्याज दरों के बीच इस समय बेहद मजबूत संबंध दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि ईरान विवाद खत्म होने और क्रूड के सस्ता होने पर हेडलाइन महंगाई में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती का रास्ता भी आसान हो सकता है।
इस बीच अमेरिकी बॉन्ड बाजार में भी हलचल बनी हुई है। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड 2023 के बाद के ऊंचे स्तरों में पहुंच गई है। ऐसे माहौल में निवेशक महंगाई, ब्याज दरों और अमेरिकी सरकारी कर्ज से जुड़े जोखिमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
नॉर्वे के 75 अरब डॉलर वाले फैसले पर भी बोले बेसेंट
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने नॉर्वे के सॉवरेन वेल्थ फंड से जुड़ी खबरों पर भी प्रतिक्रिया दी। रिपोर्टों के मुताबिक, नॉर्वे का फंड अमेरिकी ट्रेजरी में अपनी हिस्सेदारी करीब 75 अरब डॉलर तक घटाने पर विचार कर रहा है।
हालांकि, बेसेंट ने इस कदम को लेकर ज्यादा चिंता नहीं जताई। उनका कहना है कि नॉर्वे का फंड संभवतः बेहतर रिटर्न हासिल करने के लिए अमेरिकी संपत्तियों के दूसरे विकल्पों की ओर रुख कर रहा है।
उन्होंने फैनी मॅई, फ्रेडी मैक और गिन्नी मॅई जैसी संस्थाओं से जुड़े सिक्योरिटीज का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें ट्रेजरी बॉन्ड की तुलना में ज्यादा प्रीमियम मिल सकता है।
अमेरिकी सरकारी कर्ज के बढ़ते आकार के बीच यह घटनाक्रम भी अहम माना जा रहा है। अमेरिकी फेडरल कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर चुका है, ऐसे में वैश्विक निवेशकों के फैसलों पर बाजार की नजर बनी हुई है।