KNEWS DESK – बॉलीवुड के दमदार कलाकारों की बात हो तो पंकज त्रिपाठी का नाम जरूर लिया जाता है। बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के उन्होंने अपनी मेहनत और शानदार अभिनय के दम पर हिंदी सिनेमा में खास मुकाम बनाया। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘मिर्जापुर’, ‘क्रिमिनल जस्टिस’ और ‘स्त्री’ जैसे प्रोजेक्ट्स ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।
लेकिन पंकज त्रिपाठी की जिंदगी से जुड़ी एक ऐसी कहानी भी है, जो उनकी जन्मतिथि को बेहद खास बना देती है। दरअसल, अभिनेता साल में दो बार अपना जन्मदिन मनाते हैं।
5 सितंबर नहीं, ये है असली जन्मदिन
पंकज त्रिपाठी का जन्मदिन आमतौर पर 5 सितंबर को मनाया जाता है। खास बात यह है कि इसी दिन देश में शिक्षक दिवस भी मनाया जाता है। हालांकि, अभिनेता ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी वास्तविक जन्मतिथि 28 सितंबर है।
दरअसल, स्कूल में दाखिले के दौरान उनकी जन्मतिथि दर्ज कराने में एक दिलचस्प गलती हो गई थी।
कैसे बदल गई जन्मतिथि?
पंकज त्रिपाठी ने समदीश भाटिया के साथ बातचीत में बताया था कि जब उनके बड़े भाई उनका स्कूल में एडमिशन कराने गए थे, तब उन्हें पंकज के जन्म का महीना तो याद था, लेकिन तारीख याद नहीं थी।
ऐसे में स्कूल के शिक्षक ने उन्हें सुझाव दिया कि जन्मतिथि 5 सितंबर लिख दी जाए। शिक्षक ने इस तारीख को शुभ बताते हुए कहा था कि यह दिन उनके लिए अच्छा साबित होगा।
बाद में यही तारीख उनके आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज हो गई। पंकज त्रिपाठी आज भी 5 सितंबर और 28 सितंबर, दोनों तारीखों पर जन्मदिन सेलिब्रेट करते हैं।
गांव से निकलकर बॉलीवुड तक बनाया मुकाम
बिहार के गांव से निकलकर मुंबई की फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाना पंकज त्रिपाठी के लिए आसान नहीं था। उन्होंने छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत की और धीरे-धीरे अपनी अदाकारी से दर्शकों और फिल्म निर्माताओं का ध्यान खींचा।
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से उन्हें बड़ी पहचान मिली। इसके बाद ‘मिर्जापुर’ में कालीन भैया के किरदार ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी। ‘स्त्री’ और ‘क्रिमिनल जस्टिस’ जैसे प्रोजेक्ट्स में भी उनके अभिनय को खूब सराहा गया।
पंकज त्रिपाठी इन दिनों ‘मिर्जापुर द मूवी’ को लेकर भी चर्चा में हैं। फिल्म 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इसमें एक बार फिर कालीन भैया के किरदार में उनकी वापसी हुई है।
यानी जिस 5 सितंबर की तारीख को कभी स्कूल के शिक्षक ने उनके लिए शुभ बताया था, वही तारीख आज पंकज त्रिपाठी की पहचान का हिस्सा बन चुकी है।