Knews Desk: कुछ साल पहले तक 5,000mAh बैटरी को स्मार्टफोन के लिए काफी बड़ी क्षमता माना जाता था, लेकिन 2026 में स्मार्टफोन इंडस्ट्री में बैटरी को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब 8,000mAh और यहां तक कि 10,000mAh क्षमता वाली बैटरी से लैस फोन भी बाजार में आने लगे हैं। जनवरी 2026 में 6,000mAh या उससे ज्यादा बैटरी वाले स्मार्टफोन की ग्लोबल बिक्री में हिस्सेदारी 29 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा सिर्फ 10 फीसदी था। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह सिलिकॉन-कार्बन बैटरी टेक्नोलॉजी को माना जा रहा है।
2026 में कई स्मार्टफोन कंपनियां ज्यादा क्षमता वाली बैटरी को अपने फोन की खासियत बना रही हैं। ऑनर X70 5G में 8,300mAh की बैटरी दी गई है, जबकि शाओमी के Redmi Note 17 Pro Max में चीन में 10,000mAh बैटरी देखने को मिली है। ग्लोबल मार्केट में इसी फोन में 9,210mAh क्षमता वाली बैटरी दी गई है। वहीं Poco M8 Power में भी 8,000mAh बैटरी उपलब्ध है। यानी बड़ी बैटरी अब सिर्फ प्रीमियम या खास कैटेगरी के फोन तक सीमित नहीं रह गई है।
इस बदलाव के पीछे सिलिकॉन-कार्बन बैटरी टेक्नोलॉजी सबसे अहम कारण है। पारंपरिक स्मार्टफोन बैटरियों में ग्रेफाइट एनोड का इस्तेमाल होता है और इसकी ऊर्जा स्टोर करने की क्षमता सीमित होती है। इसके मुकाबले सिलिकॉन ज्यादा ऊर्जा स्टोर कर सकता है। हालांकि, सिलिकॉन की एक समस्या यह है कि चार्जिंग के दौरान इसमें काफी फैलाव होता है, जिससे बैटरी की लाइफ और स्थिरता प्रभावित हो सकती है। सिलिकॉन-कार्बन बैटरी में कार्बन स्ट्रक्चर सिलिकॉन के इस फैलाव को संभालने में मदद करता है। इससे लगभग उतनी ही जगह में ज्यादा क्षमता वाली बैटरी लगाना संभव हो जाता है।यहां यह समझना भी जरूरी है कि सिलिकॉन-कार्बन बैटरी कोई सॉलिड-स्टेट बैटरी नहीं है। यह अभी भी लिथियम-आयन बैटरी तकनीक पर आधारित है, लेकिन इसमें एनोड के स्तर पर नई सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। यही तकनीक स्मार्टफोन कंपनियों को बिना फोन का आकार बहुत ज्यादा बढ़ाए ज्यादा बैटरी क्षमता देने में मदद कर रही है।
इस टेक्नोलॉजी को अपनाने में चीनी कंपनियां सबसे आगे नजर आ रही हैं। काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, 6,000mAh या उससे ज्यादा बैटरी वाले सबसे ज्यादा बिकने वाले 10 स्मार्टफोन में सभी चीनी कंपनियों के फोन शामिल थे। इनमें वीवो, शाओमी, ओप्पो और ऑनर जैसे ब्रांड शामिल हैं। इन 10 फोन में से छह में सिलिकॉन-कार्बन बैटरी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था। कंपनियां बड़ी बैटरी देने के साथ फोन को बहुत ज्यादा मोटा या भारी होने से बचाने की कोशिश कर रही हैं।हालांकि, बड़ी बैटरी और नई तकनीक के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। ज्यादा सिलिकॉन के कारण बैटरी के फैलाव, निर्माण की जटिलता और लंबे समय में क्षमता कम होने जैसी चिंताएं बनी हुई हैं। सैमसंग के अनुसार, सिलिकॉन-कार्बन सामग्री ग्रेफाइट की तुलना में ज्यादा प्रतिक्रियाशील होती है। इसलिए लंबे समय तक स्थिरता बनाए रखने के लिए बैटरी सिस्टम में बदलाव जरूरी हो सकते हैं। शाओमी का दावा है कि Redmi Note 17 Pro Max की बैटरी 1,600 पूरे चार्ज साइकल के बाद भी कम से कम 80 फीसदी क्षमता बनाए रखती है, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र जांच अभी बाकी है।
अब सवाल है कि क्या 10,000mAh बैटरी भविष्य में स्मार्टफोन का नया सामान्य मानक बन जाएगी? फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। काउंटरपॉइंट के विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले समय में सिलिकॉन-कार्बन टेक्नोलॉजी को अपनाने की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है। लागत का दबाव और मेमोरी की कमी जैसी चुनौतियां कंपनियों के बजट को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, 2027 में नई तकनीकी प्रगति और 2028 के आसपास इस टेक्नोलॉजी के बड़े स्तर पर इस्तेमाल की संभावना जताई गई है।फिलहाल इतना साफ है कि स्मार्टफोन बैटरी की पुरानी 5,000mAh वाली सीमा तेजी से पीछे छूट रही है। 8,000mAh और उससे ज्यादा क्षमता वाली बैटरी अब बाजार में दिखाई देने लगी हैं और सिलिकॉन-कार्बन तकनीक इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बन रही है। आने वाले वर्षों में यह तकनीक स्मार्टफोन की बैटरी क्षमता, डिजाइन और बैटरी बैकअप के अनुभव को और बदल सकती है।