KNews Desk: उत्तर कोरिया में किम जोंग उन ने सेना की शीर्ष नेतृत्व में बड़ा फेरबदल किया है। देश के रक्षा मंत्री नो क्वांग चोल को उनके पद से हटा दिया गया है। इसके साथ ही सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी में भी उनकी रैंक कम कर दी गई है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर प्योंगयांग लगातार नाराजगी जाहिर करता रहा है।
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक, शनिवार को किम जोंग उन की अध्यक्षता में हुई बैठक में सेना के पुनर्गठन से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। इसे ‘स्ट्रक्चरल री-ऑर्गनाइजेशन प्लान’ का हिस्सा बताया गया है। फेरबदल के तहत नो क्वांग चोल को रक्षा मंत्री के पद से हटाकर आर्मामेंट इंडस्ट्री डिपार्टमेंट का फर्स्ट डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया है।नो क्वांग चोल की जगह कोरियाई पीपुल्स आर्मी के जनरल पॉलिटिकल ब्यूरो के डायरेक्टर किम सोंग-गी को नया रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। वहीं, वरिष्ठ अधिकारी और रक्षा सलाहकार पाक जोंग-चोन को सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का वाइस चेयरमैन बनाया गया है। उन्हें सत्तारूढ़ पार्टी के पॉलिटिकल ब्यूरो में भी शामिल किया गया है। KCNA के अनुसार, सेना के पुनर्गठन के दौरान कई अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव और प्रमोशन किए गए हैं।
सैन्य फेरबदल के बीच किम जोंग उन ने देश के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और अधिकारियों से मुलाकात भी की। उन्होंने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में हुई प्रगति की सराहना की और कुछ वैज्ञानिकों व अधिकारियों को देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। KCNA के मुताबिक, सम्मानित लोगों ने नई कॉम्बैट वेपन सिस्टम विकसित करने से जुड़ी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी चुनौतियों को हल करने में योगदान दिया है। हालांकि, उत्तर कोरिया ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन नए हथियारों की प्रकृति क्या है।इससे पहले जून के अंत में किम जोंग उन ने नई लॉन्ग-रेंज मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर और आर्टिलरी सिस्टम के परीक्षण की निगरानी की थी। ऐसे में ताजा सैन्य फेरबदल को उत्तर कोरिया की हथियार क्षमता और रक्षा रणनीति को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
उत्तर कोरियाई सेना में यह बदलाव अमेरिका और दक्षिण कोरिया के वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास के खत्म होने के तुरंत बाद हुआ है। प्योंगयांग लंबे समय से इन अभ्यासों का विरोध करता रहा है और इन्हें अपने खिलाफ संभावित हमले की तैयारी बताता है। इस साल इन अभ्यासों पर खास नजर रही, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इनके पैमाने को कम करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद उत्तर कोरिया की ओर से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ आलोचना जारी रही।ताजा फेरबदल से यह सवाल उठ रहा है कि क्या किम जोंग उन अपनी सैन्य रणनीति में किसी बड़े बदलाव की तैयारी कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय और सैन्य आयोग में महत्वपूर्ण पदों पर बदलाव के साथ हथियार प्रणालियों के विकास पर बढ़ता जोर बताता है कि प्योंगयांग अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करने पर लगातार ध्यान दे रहा है। अमेरिका की ओर से किम जोंग उन के साथ संभावित बातचीत के संकेत दिए जाने के बावजूद उत्तर कोरिया की ओर से अब तक कोई खास सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।