KNEWS DESK- नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ ने चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी भारी तबाही मचाई है। रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस आपदा की पूरी तस्वीर चीन के भीतर सामने नहीं आ पा रही है। राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन बाढ़ से हुई तबाही, पीड़ितों की स्थिति और जमीनी हालात से जुड़ी स्वतंत्र जानकारी सीमित बताई जा रही है।
नेपाल और तिब्बत के बीच प्रमुख बॉर्डर क्रॉसिंग में शामिल ग्यिरोंग पोर्ट के इलाके से बाढ़ का पानी बेहद तेज रफ्तार से गुजरा। पानी और मलबे के तेज बहाव ने रास्ते में आने वाली कई चीजों को अपनी चपेट में ले लिया। बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते देखा गया। सीसीटीवी कैमरों में कैद कुछ भयावह दृश्य बाद में सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सामने आए।
इसके बावजूद चीन के भीतर इन तस्वीरों और वीडियो की उपलब्धता बेहद सीमित रही। सरकारी मीडिया ने घटना से जुड़ी कुछ तस्वीरें और राहत-बचाव अभियान की चुनिंदा फुटेज ही प्रसारित की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, चीन के नियंत्रित इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र पोस्ट, प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी और पीड़ितों से जुड़ी सामग्री तलाशना भी मुश्किल है।
चीनी सरकार ने राहत और बचाव अभियान के लिए बड़ी संख्या में आपातकर्मियों को प्रभावित इलाकों में भेजा है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अधिकारियों के साथ आपात बैठक की, जबकि प्रधानमंत्री को प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने भेजा गया। सरकारी फुटेज में बचावकर्मी मलबे, पहाड़ी इलाकों और तेज बहती नदियों के बीच लोगों की तलाश करते नजर आए।
हालांकि, प्रभावित परिवारों की व्यक्तिगत कहानियां, बचे हुए लोगों के बयान और लापता लोगों के परिजनों की आवाजें सार्वजनिक रूप से बहुत कम सामने आई हैं। विदेशी पत्रकारों के लिए तिब्बत में स्वतंत्र रूप से यात्रा करना भी आसान नहीं है और कई क्षेत्रों में सरकारी अनुमति की जरूरत होती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, तिब्बत का संवेदनशील राजनीतिक इतिहास भी आपदा की कवरेज को प्रभावित करता है। चीन ने 1950 के दशक में तिब्बत पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था और इसके बाद से वहां राजनीतिक और धार्मिक गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रहा है।
आपदा के बाद स्थानीय कम्युनिस्ट पार्टी कार्यालय ने अपने सदस्यों से राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने, प्रभावित लोगों को भावनात्मक सहयोग देने और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार के आधिकारिक विवरण से अलग जानकारी साझा करने या विदेशी पत्रकारों से बात करने वाले तिब्बतियों को कार्रवाई का डर रहता है। ऐसे में बाढ़ की वास्तविक तबाही और इसके मानवीय प्रभाव की पूरी तस्वीर सामने आने को लेकर सवाल बने हुए हैं।