दिल्ली रेस क्लब को बड़ा झटका, खाली करने के आदेश पर रोक से कोर्ट का इनकार

पटियाला हाउस कोर्ट ने केंद्र सरकार के बेदखली आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए क्लब की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि क्लब प्रथमदृष्टया ऐसा मामला पेश नहीं कर सका, जिसके आधार पर उसे राहत दी जा सके।

Knews Desk: दिल्ली रेस क्लब को पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से जारी परिसर खाली करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। क्लब ने 11 अगस्त 2026 को जारी बेदखली आदेश को चुनौती देते हुए अदालत से राहत मांगी थी, लेकिन उसकी अर्जी खारिज कर दी गई।

एस्टेट ऑफिसर ने पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट के तहत क्लब को परिसर खाली करने का निर्देश दिया था। आदेश में क्लब को 15 दिन के भीतर जगह खाली करने के लिए कहा गया था। क्लब ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

1994 से लीज नहीं हुई रिन्यू

मामले में केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि दिल्ली रेस क्लब की लीज 1994 के बाद से रिन्यू नहीं हुई है। सरकार के मुताबिक, इसके बाद क्लब का कब्जा महीने-दर-महीने किराये की व्यवस्था के आधार पर बना रहा।

वहीं, क्लब की ओर से दावा किया गया कि उसने किराये का भुगतान किया है और 2013 में लीज बढ़ाने के लिए रकम भी जमा की थी। क्लब ने इन परिस्थितियों को अपने पक्ष में बताते हुए कहा कि इससे संकेत मिलता है कि लीज को आगे बढ़ाया गया था।

हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि लीज खत्म होने के बाद किराया देते रहने मात्र से लीज के नवीनीकरण का दावा अपने आप साबित नहीं होता।

कोर्ट ने कहा- क्लब को कई मौके मिले

अदालत ने पाया कि एस्टेट ऑफिसर की कार्यवाही के दौरान क्लब को सरकार की शिकायत की कॉपी उपलब्ध कराई गई थी। इसके अलावा क्लब को अपना जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त अवसर भी दिए गए थे। कोर्ट के मुताबिक, क्लब इन अवसरों का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने में सफल नहीं रहा।

क्लब ने यह भी तर्क दिया कि इसी संपत्ति से जुड़े पुराने मामले में 1999 का शो-कॉज नोटिस दिल्ली हाई कोर्ट रद्द कर चुका है। इसलिए उसी विवाद को दोबारा उठाना रेस जुडिकाटा के सिद्धांत के खिलाफ है।

लेकिन अदालत ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि 1999 का नोटिस लीज की स्थिति तय करने या लीज की री-एंट्री क्लॉज लागू करने के आधार पर जारी नहीं हुआ था। इसलिए पुराने मामले के आधार पर मौजूदा बेदखली कार्रवाई को रोकने का आधार नहीं बनता।

15 दिन में परिसर खाली करने का आदेश

पटियाला हाउस कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पितांबर दत्त ने क्लब की अंतरिम अर्जी खारिज कर दी। इससे फिलहाल 11 अगस्त को जारी बेदखली आदेश पर कोई रोक नहीं लगी है और क्लब को सरकारी आदेश के मुताबिक परिसर खाली करना होगा।

दिल्ली रेस क्लब सेंट्रल गोल्फ लिंक रोड पर स्थित है और प्रधानमंत्री आवास के आसपास के बेहद महत्वपूर्ण इलाके में आता है। यह क्लब घुड़दौड़ से जुड़ी राजधानी की पुरानी संस्थाओं में शामिल है। ऐसे में बेदखली का यह मामला सिर्फ संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी जमीन के इस्तेमाल और पुराने लीज अधिकारों से जुड़े सवालों को भी सामने लाता है।

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