Knews Desk: IIT दिल्ली में MSc फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद शुरू हुआ छात्र आंदोलन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। छात्रों ने संस्थान प्रशासन के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन तेज करने का फैसला किया है। इसी बीच मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय कमेटी से उत्तराखंड के पूर्व DGP और IIT दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार ने अपना नाम वापस ले लिया है।
IIT दिल्ली प्रशासन ने मंगलवार को ऋषिकेश कुमार की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए बाहरी सदस्यों वाली पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। कमेटी की अध्यक्षता पूर्व DGP अशोक कुमार को सौंपी गई थी। इसमें AIIMS नई दिल्ली के साइकियाट्री विभाग के प्रमुख प्रो. प्रताप शर्मा, दो छात्र प्रतिनिधि और IIT दिल्ली के रजिस्ट्रार को शामिल किया गया था। कमेटी को दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। हालांकि, गठन के अगले ही दिन अशोक कुमार ने समिति से अपना नाम वापस ले लिया। अब प्रशासन की ओर से जल्द ही उनके स्थान पर नए सदस्य के नाम की घोषणा की जा सकती है।
अधिकारियों के इस्तीफे की मांग पर अड़े छात्र
प्रदर्शनकारी छात्र स्टूडेंट्स अफेयर्स डीन और केमिस्ट्री विभाग के प्रमुख समेत जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक, पिछले करीब 30 महीनों में IIT दिल्ली में आठ छात्रों ने आत्महत्या की है। उनका कहना है कि संस्थान में ऐसा सुरक्षित और सहयोगी माहौल तैयार किया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सिग्नेचर कैंपेन से आंदोलन को व्यापक बनाने की तैयारी
25 अगस्त की रात हुई बैठक में छात्रों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की। छात्रों ने तय किया कि प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर पर्याप्त कदम उठाए जाने तक विरोध जारी रहेगा। साथ ही IIT दिल्ली के एलुमनाई को आंदोलन से जोड़ने के लिए सिग्नेचर कैंपेन शुरू किया जाएगा।
छात्रों की प्रमुख मांगों में निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और मृतक छात्र के परिवार को मुआवजा देना शामिल है। प्रदर्शनकारी पहले ही चार वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे और परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग उठा चुके हैं।
कथित उत्पीड़न के मामलों के सबूत जुटाएंगे
बैठक में छात्रों ने फैकल्टी-पियर और पियर-टू-पियर स्तर पर कथित डराने-धमकाने के मामलों को लेकर भी चर्चा की। छात्रों ने ऐसे मामलों से जुड़े सबूत जुटाने और उन्हें उचित शिकायत निवारण व्यवस्था के सामने रखने का फैसला किया है।
छात्रों ने यह भी तय किया कि आंदोलन के दौरान उन्हें भड़काने या उकसाने की कोशिश होने पर वे संयम बनाए रखेंगे। उनका कहना है कि आंदोलन को सामूहिक और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
कक्षाओं में जाने की पूरी आजादी
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी छात्र को कक्षा में जाने से नहीं रोका जाएगा। क्लास बायकॉट को लेकर छात्रों का कहना है कि प्रत्येक छात्र अपने विवेक के आधार पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है।
छात्रों के मुताबिक, आगे की रणनीति सामूहिक बैठकों में तय की जाएगी। उनका कहना है कि आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के हित के लिए नहीं, बल्कि कैंपस में छात्रों की सुरक्षा, जवाबदेही और बेहतर माहौल की मांग को लेकर किया जा रहा है।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने भी मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।